विषमता त्यागकर समता भाव अपनाना ही सच्चा जैनत्वःडॉ. सुरेंद्र मुनि

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 24 सितम्बर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित भगवान महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि विषमता को छोड़कर समता को धारण करना ही वास्तविक जैनत्व है। जहां विषमता संसार को बढ़ाती है, वहीं समता मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। समत्व ही योग है, समत्व ही सामायिक है और यही आत्मा का शुद्ध स्वरूप है।
मुनिश्री ने वर्तमान मानवीय व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का मनुष्य छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होकर आगबबूला हो जाता है और समता भाव का त्याग कर देता है। थोड़ी सी भी प्रतिकूलता आने पर वह अपना आपा खो बैठता है, जिसके कारण उसका स्वर्ग जैसा जीवन भी नरक समान बन जाता है।
उन्होंने दैनिक जीवन में समता के महत्व को समझाते हुए कहा कि सुबह उठते ही व्यक्ति की दिनचर्या शुरू होती है। विभिन्न कार्यों को संपन्न करने के सिलसिले में उसे परिवार, समाज और व्यापार के क्षेत्र में अनेक लोगों से मिलना और संवाद करना पड़ता है। यदि व्यक्ति प्रत्येक परिस्थिति और कार्य में समत्व भाव धारण कर ले, तो सभी समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जाता है और स्थायी शांति की प्राप्ति होती है। भगवान महावीर ने भी इसी समत्व भाव को सामायिक कहा है।
धार्मिक सभा में प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने भगवान महावीर की साधना के मूल तत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान महावीर की साधना का सार श्समताश् है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मानसिक और शारीरिक समता बनाए रखकर ही मानव का वास्तविक विकास संभव है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर और आचार्य मानतुंग के जीवन में अनेक कष्ट और प्रतिकूल परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने हर क्षण समता भाव बनाए रखा। हमें भी इन महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने दैनिक जीवन में समत्व का अभ्यास कायम रखना चाहिए।
सभा के दौरान उपाध्याय रमेश मुनि दीपेशमुनि  के शुभ विचारों एवं संदेशों का भी श्रवण किया गया। कार्यक्रम में इचलकरंजी, मुम्बई दिल्ली आदि विभिन्न क्षेत्रों से पधारे समाजसेवियों का संघ द्वारा भावभीना अतिथि सत्कार और अभिनंदन किया गया।

By Udaipurviews

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