उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में डॉ सुरेंद्र मुनि ने धर्म, संयम और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए। धर्म का आचरण व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करने के साथ ही जीवन को सही दिशा देता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को दूसरों के प्रति करुणा, प्रेम और सद्भाव का भाव रखना चाहिए। केवल बाहरी धार्मिक क्रियाएं ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि धर्म के सिद्धांतों को अपने व्यवहार और जीवनशैली में उतारना आवश्यक है। अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से दूर रहकर संयमित जीवन जीने से आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन अत्यंत मूल्यवान है। इसका सदुपयोग करते हुए धर्म, सेवा और परोपकार के कार्यों में समय लगाना चाहिए। सच्चा धर्म वही है, जो व्यक्ति के आचरण में दिखाई दे और उसके माध्यम से समाज में प्रेम, शांति तथा भाईचारे का वातावरण बने।
डॉ राजेंद्र मुनि नें कहा कि आराधना और साधना के माध्यम से आत्मा के गुणों का जागरण होता है। आत्मिक गुण ही जीवन को शाश्वत कल्याण की ओर ले जाते हैं। साधना के प्रभाव से मानव मन में क्रूरता, स्वार्थ, परपीड़ा और बुराइयों जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। उपाध्याय रमेश मुनि व दिलेश मुनि ने मंगल वचन दिए।
उन्होंने कहा कि परिवार, संघ, समाज और राष्ट्र के विकास के लिए आत्मिक चेतना का प्रतिष्ठापन आवश्यक है। व्यक्ति को अपने भीतर एकाग्रता लाने के साथ साधना, ध्यान और योग जैसी आध्यात्मिक क्रियाओं को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्तित्व का सकारात्मक विकास होता है।
प्रवचन के दौरान लघु ध्यान कराया गया। इस अवसर पर श्री संघ की ओर से समाजसेवी विजय जैन का स्वागत एवं सम्मान भी किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात कर जीवन में साधना को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारी, श्रावक-श्राविकाएं एवं बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
धर्म के मार्ग पर चलने से जीवन में आती है शांति और संतोषःडॉ.सुरेंद्र मुनि
