गुरु माँ 105 श्री सुप्रकाश मति माताजी के 61वें जन्मोत्सव पर ध्यानोदय तीर्थ बलीचा में 61 चम्पा वृक्षों का रोपण
उदयपुर। परम पूज्य गुरु माँ 105 श्री सुप्रकाश मति माताजी के 61वें जन्मजयंती महोत्सव के पावन अवसर पर ध्यानोदय तीर्थ क्षेत्र, बलीचा, उदयपुर पर अखिल भारतीय सुप्रकाश ज्योति मंच (राष्ट्रीय एवं उदयपुर शाखा) द्वारा पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया गया। मंच द्वारा गुरु माँ को भेंट स्वरूप 61 चम्पा के वृक्षों का वृक्षारोपण किया गया।
वृक्षारोपण संयोजक एवं मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक जैन ने बताया कि यह आयोजन रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर गुरु माँ ने अहमदाबाद से लाइव जुड़कर अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
गुरु माँ ने अपने उद्बोधन में कहा कि “वृक्ष लगाना केवल धरती को हरियाली देना नहीं, बल्कि असंख्य जीवों को जीवन देना है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर 108 सर्वाैषधि कलशों का अभिषेक और 61 वृक्षों का यह पुण्य कार्य सभी भक्तों के जीवन में स्वास्थ्य, शांति, सुख और मंगल लेकर आए। आप सभी जीव-दया, पर्यावरण रक्षा और धर्म के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ें। मेरा मंगल आशीर्वाद आप सभी के साथ है। जीवों की रक्षा करें, वृक्षों की सेवा करें और धर्म को जीवन में उतारें। साथ ही आज रक्षाबंधन महापर्व पर श्रेयांसनाथ भगवान को निर्वाण लड्डू भेंट किया है, आपने अवश्य एक दिन आप मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो पाएं यही मेरा आशीर्वाद है।”
कार्यक्रम के दौरान 108 सर्वाैषधि कलशों से अभिषेक और श्रेयांसनाथ भगवान को निर्वाण लड्डू भी अर्पित किया गया।
ध्यानोदय तीर्थ क्षेत्र के चेयरमैन ओमप्रकाश गोदावत ने बताया कि पूरे भारत में इस आयोजन पर नजर है, क्योंकि जैन इतिहास में पहली बार किसी जैन साध्वी जी को उनके जन्मदिन पर जितना जन्मदिन, उतने वृक्ष का वृक्षारोपण कर भेंट दी गई है। यह नई चेतना श्रावकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाएगी।
इस पुण्य अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल दोशी, अरविन्द पाडलिया, सुरेश डागरिया, विनोद कीकावत, रमेश जुसोत, जम्बू कंठालिया, के.सी. जैन, मनोज जैन (अलवर वाले), राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जीतेन्द्र रजावत, पूर्व विकास अधिकारी वीरेन्द्र धन्नावत, रवि शाह, प्रशांत मालवी, बादामी चित्तोड़ा, गणेश देवड़ा, उमेश नफवत, मनोज पाटनी, पूना महिला अध्यक्ष हर्षिता लुहाड़िया, आशा कंठालिया सहित कई गणमान्य श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर पुण्य लाभ लिया।
जैन इतिहास में पहली बार – जैन साध्वी के जन्मोत्सव पर जन्मदिन के बराबर वृक्षारोपण
