पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने दादाबाड़ी में सुना आध्यात्मिक प्रवचन, साध्वी श्रीजी ने सुनाया राजा बली-विष्णु का प्रसंग
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित नियमित आध्यात्मिक प्रवचन में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया पहुंचे। उन्होंने साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 के प्रवचन का काफी देर तक श्रवण किया। ट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा, गजेंद्र भंसाली सहित अन्य पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि उच्च पद पर आसीन होने के बावजूद गुलाबचंद कटारिया का धर्म और संत परंपरा से जुड़ाव उनकी सहजता और सरलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब भी अवसर मिलता है, कटारिया साधु-संतों के दर्शन और प्रवचन श्रवण को प्राथमिकता देते हैं।
रक्षाबंधन के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए साध्वी श्रीजी ने कहा कि यह पर्व प्रेम और सुरक्षा की भावना का प्रतीक है। भारतीय परंपरा में समाज की विभिन्न व्यवस्थाओं के अनुसार अलग-अलग वर्गों को उनके दायित्व सौंपे गए थे। ब्राह्मणों से रक्षा एवं धर्म मार्गदर्शन, वैश्य से व्यापार, क्षत्रिय से पराक्रम एवं सेवा तथा शूद्र वर्ग से सेवा कार्य जुड़े रहे।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन का संबंध ब्राह्मण परंपरा से रहा है। वे घर-घर जाकर रक्षा सूत्र बांधते और दक्षिणा के रूप में अनाज, राशन आदि प्राप्त करते थे। वहीं दीपावली पर वैश्य वर्ग में व्यापारिक बहीखातों का हिसाब देखने की परंपरा रही। क्षत्रिय वर्ग विजयदशमी पर अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करता था, जबकि होली को उत्सव और उल्लास के पर्व के रूप में मनाया जाता रहा।
राजा बली के प्रसंग से समझाया जीवन का सार
साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने सनातन परंपरा में रक्षाबंधन से जुड़े राजा बली और भगवान विष्णु के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि राजा बली ने दान, तपश्चर्या और यज्ञ से अपनी शक्ति बढ़ाई। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर बली से तीन पग भूमि मांगी। बाद में विराट स्वरूप धारण कर उन्होंने दो पग में धरती और देवलोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान मांगा तो बली ने अपना सिर प्रस्तुत कर दिया।
साध्वी श्रीजी ने इस प्रसंग को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि हम अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए चौकीदार रखते हैं, लेकिन यह विचार करना जरूरी है कि हमारे जीवन का चौकीदार कौन है। उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है, जब हम परमात्मा की आज्ञा और सिद्धांतों को अपने जीवन में स्थान दें। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का चौकीदार परमात्मा को बनाना चाहिए।
धर्मसभा में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचन्द कटारिया ने भी इस प्रसंग का श्रवण कर साध्वीजी से आशीर्वाद प्राप्त किया। साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ प्रवचन एवं भक्ति गीतों का श्रवण किया।
रक्षाबंधन का संदेशःरिश्तों की रक्षा से आगे धर्म और जीवन की रक्षा जरूरी-साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
