उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में डॉ सुरेंद्र मुनि ने कहा कि संसार के पदार्थों के प्रति मोह ही मनुष्य के सुख-दुख का प्रमुख कारण बनता है। मनुष्य बाहरी वस्तुओं में सुख तलाशता है, जबकि वास्तविक शांति आत्मचिंतन और संयमित जीवन से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में प्राप्त पदार्थों का सदुपयोग करना चाहिए। जो वस्तुएं आज हमारे पास हैं, वे हमेशा हमारे साथ नहीं रहेंगी। इसलिए भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति रखने के बजाय मन को धर्म और आत्मकल्याण की ओर लगाना चाहिए।
प्रवचन में प्रवर्तक डॉ राजेन्द्र मुनि ने भगवान महावीर के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जीवों के प्रति दया, करुणा और संयम का भाव ही जीवन को सार्थक बनाता है। व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म साधना को महत्व देते हुए मोह-माया से ऊपर उठने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा का कल्याण ही मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। धर्म, संयम और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
पदार्थ नहीं, आत्मचिंतन से मिलता है जीवन का सच्चा सुख
