जनुभाई के बताये रास्ते एवं उनके सपनों को पूरा करने का लिया संकल्प – कुलपति प्रो. मंजु मांडोत

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

राजस्थान विद्यापीठ का 90वां स्थापना दिवस धूमधाम से सम्पन्न
-जनुभाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन
-स्थापना दिवस मूल्यों, संस्कारों और संघर्षों को स्मरण करने का दिन – प्रो. मंजू मंडोत
-संघर्ष, संस्कार और समर्पण से मजबूत होती हैं संस्थाएं – प्रो. दिव्या प्रभा नागर

उदयपुर 21 अगस्तध्/राजस्थान विद्यापीठ का 90वां संस्था स्थापना दिवस शुक्रवार को प्रतापनगर स्थित परिसर के कम्प्यूटर एण्ड आईटी सभागार में विद्यापीठ के तीनों परिसरों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में हर्षोल्लास से मनाया गया।
समारोह का शुभारंभ कुलपति प्रो. मंजु मांडोत, मुख्य अतिथि पूर्व कुल प्रमुख प्रफुल्ल नागर, पुर्व कुलपति प्रो. दिव्य प्रभा नागर, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, आशीष नागर, प्रो. मलय पानेरी, प्रो. सरोज गर्ग ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्जवलित एवं संस्था का झण्डारोहण कर किया, इससे पूर्व अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतापनगर परिसर में स्थापित जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. मंजू मंडोत ने कहा कि आज का दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहींे है बल्कि यह वह पवित्र दिन है जो हमें हमारी जडो, हमारी जिम्मेदारियों , हमारे मूल्यों और उस महान व्यक्तित्व की याद दिलाता है, जिन्होंने एक ऐसे सपने को जन्म दिया है जो आज एक विशाल शैक्षणिक संस्थान के रूप में हमारे सामने खडी है। उन्होंने कहा कि ‘जनु भाई’ के लिए शिक्षा केवल व्यक्तित्व विकास का माध्यम नहीं थी, बल्कि सामाजिक चेतना, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण का आधार थी।  प्रो. मंडोत ने कहा कि विद्यापीठ आज भी ‘जनु भाई’ के विचारों को आधार बनाकर समाज की बदलती आवश्यकताओं और नवीन चुनौतियों के अनुरूप विकास के पथ पर अग्रसर है। नवीनतम तकनीक एवं नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों के साथ विद्यापीठ के शिक्षक परंपराओं, मूल्यों और कृतज्ञता के भाव को आत्मसात करते हुए शैक्षिक उत्कृष्टता, शोध, सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार और पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व शिक्षा की बात करना अपराध माना जाता था ऐसी विपरित परिस्थितियों में संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर ने आजादी के दस वर्ष पूर्व 26 वर्ष की उम्र में शिक्षा के माध्यम से देश में आजादी की अलख जगाने के उद्देश्य से 21 अगस्त, 1937 को साक्षरता, बेहतर शिक्षा तथा मूल्य बोध को लेकर एक छोटे से पौधे के  रूप में राजस्थान विद्यापीठ की स्थापना की थी, जो आज वो दस हजार से ज्यादा विधार्थियों, 75 से ज्यादा कोर्सेस, 50 से ज्यादा सर्टिफिकेट कोर्सेस के साथ संस्थान ने वट वृक्ष का रूप ले लिया है। तीन रूपये से शुरू इस संस्थान का वर्तमान में 70 करोड़ का वार्षिक बजट है जो अपने आप में एक कीर्तिमान स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि जनुभाई को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके मिशन को आगे बढायेगे।

पूर्व कुलपति प्रो. दिव्य प्रभा नगर ने अपने वक्तव्य में कहा कि पंडित नागर का व्यक्तित्व शिक्षा, समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए समर्पित था। उन्होंने उनकी माताजी के प्रभाव को भी रेखांकित किया और बताया कि बचपन से ही उनके व्यक्तित्व में सेवा और समर्पण के बीज बो दिए गए थे। प्रो. नागर ने कहा कि निर्माण सदैव समय लेता है। संघर्ष और अभावों के बीच नए पथ का निर्माण चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर सहभागिता निभानी होगी। उन्होंने कहा कि चरित्रवान, राष्ट्र समर्पित और संवेदनशील पीढ़ी का निर्माण ही देश निर्माण के यज्ञ में हमारी सार्थक आहुति है। प्रो. नागर ने ‘जनु भाई’ को शब्दांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता रेखांकित की।

संघर्ष ही उन्नति का मार्ग – प्रफुल्ल नागर

विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व कुलपति श्री प्रफुल्ल नागर ने कहा कि संघर्ष ही उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने विद्यापीठ के प्रारंभिक दौर में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों तथा समाज निर्माण को लेकर ‘जनु भाई’ के विचारों और दर्शन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संस्थाएं विचारों और संस्कारों की शक्ति से मजबूत होती हैं तथा कार्यकर्ताओं के समर्पण और त्याग से उनकी विकास यात्रा आगे बढ़ती है। विद्यापीठ अपने सामाजिक दायित्वों और सामुदायिक सरोकारों को पूरा करते हुए अपने उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

विशिष्ट अतिथि श्री आशीष नागर ने कहा कि विद्यापीठ ने समय और आवश्यकता के अनुरूप बदलाव करते हुए रोजगारपरक कार्यक्रमों को अपनाया है। इसके माध्यम से संवेदनशील और सक्षम पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है।

राष्ट्र की शैक्षिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति में विद्यापीठ की महत्ती भूमिका – कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर

कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर के संदेश का वाचन करते हुए प्रो. सरोज गर्ग ने कहा कि यह दिवस बीतें वर्षों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन तथा नवीन दायित्व बोध का है। नई पीढी से मेवाड के ग्रामीण समुदाय के काम हाथ मे लेते हुए जनुभाई के सपनों केा पूरा करने की बात कही। राष्ट्र की शैक्षिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति में विद्यापीठ अपनी भूमिका को निरंतर सक्रिय बनाए हुए हैं। अच्छे समाज को बनाने की जिम्मेदारी शिक्षक की है। जिसकी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे छात्र निर्माण अपना सर्वस्व दें और समाज के सामने ऐसे छात्रों को उपस्थित कर मिसाल कायम करें।
समारेाह में इतिहासविद् प्रो. हेमेन्द्र चौधरी,  रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, पुरूषोतम शर्मा ने भी जनुभाई की जीवनी एवं उनके संस्समरणों का साझा  किया। संचालन डॉ. हरीश चौबीसा  ने किया जबकि आभार प्रो. मलय पानेरी ने जताया।

इस अवसर पर प्रो. जीएम मेहता, प्रो. पारस जैन, प्रो. अमी राठौड, प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. बलिदान जैन, प्रो. रचना राठौड, डॉ. प्रकाश धाकड, डॉ. भवानीपाल सिंह, डॉ. एसबी नागर, डॉ. बबीता रसीद, प्रो. लालाराम जाट, प्रो. धीरज प्रकाश जोशी, डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. दिलीप सिंह चौहान, किशन सिंह राव, राजेन्द्र,  आरीफ मोहम्मद, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड, डॉ. अमीया गोस्वामी, डॉ. आशीष डी नंदवाना, डॉ. मोहसीन छीपा,. राजन सुद, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, आशीष नंदवाना, उमराव सिंह राणावत,  डॉ. अलक नंदा, उदय भान सिंह सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर एवं शहर के गणमान्य नागरिको ने जनुभाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हे नमन किया।

By Udaipurviews

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