विद्या भवन में ऑटिज़्म जागरूकता एवं शिक्षक क्षमता-वर्धन सत्र आयोजित

विद्या भवन में ऑटिज़्म जागरूकता एवं शिक्षक क्षमता-वर्धन सत्र
उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब हम प्रत्येक नागरिक के स्वतंत्रता, समानता और सम्मान के अधिकार का उत्सव मनाते हैं, ऐसे में बच्चों के लिए एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, जहाँ प्रत्येक बच्चा अपनी विशिष्टताओं के साथ सीखने, अभिव्यक्त होने और आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र हो। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए विद्या भवन वेलनेस विभाग द्वारा पूर्व-प्राथमिक (प्री-प्राइमरी) शिक्षकों के लिए ऑटिज़्म जागरूकता एवं क्षमता-वर्धन सत्र का आयोजन किया गया।

इस सहयोगात्मक कार्यशाला में विद्या भवन पब्लिक स्कूल, विद्या भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल (देवाली) एवं विद्या भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल (रामगिरी) के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।

सत्र का संचालन विद्या भवन वेलनेस टीम की समन्वयक डॉ. निष्ठा जैन एवं मिस शॉनटेल रश द्वारा किया गया। मिस शॉनटेल 1995 से लंदन में ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के साथ शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही हैं और उन्हें ऑटिज़्म एवं ADHD के शुरुआती संकेतों की पहचान तथा बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण रणनीतियाँ विकसित करने का व्यापक व्यावहारिक अनुभव है। उन्होंने अपनी bachelors एवं masters शिक्षा के क्षेत्र में कनाडा तथा यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से प्राप्त कि है ।

कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को ऑटिज़्म के शुरुआती संकेतों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया। इन संकेतों को संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक एवं संवेदी व्यवहार के संदर्भ में समझाया गया, ताकि शिक्षक बच्चों के व्यवहार में दिखाई देने वाले विभिन्न संकेतों को संवेदनशीलता और समझ के साथ देख सकें।

सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि प्रारंभिक पहचान किसी बच्चे को किसी लेबल में सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि उसकी आवश्यकताओं को समय रहते समझकर उचित सहयोग उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक स्तर पर सही मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता मिलने से बच्चों के संचार, सामाजिक सहभागिता, भावनात्मक विकास और सीखने की क्षमता को बेहतर समर्थन मिल सकता है।

शिक्षकों को मुख्यधारा की कक्षाओं में ऑटिस्टिक बच्चों के साथ प्रभावी एवं संवेदनशील तरीके से कार्य करने के लिए विभिन्न व्यावहारिक रणनीतियों से परिचित कराया गया। सुश्री रश ने मौखिक संकेतों (Verbal Cues), दृश्य सहायक सामग्री (Visual Aids), संरचित गतिविधियों एवं शारीरिक गतिविधियों के समन्वय के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाने के तरीके प्रदर्शित किए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक बच्चा अलग होता है और इसलिए उसकी सीखने की शैली, संवेदी आवश्यकताओं और संवाद करने के तरीके को समझना एक समावेशी कक्षा की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

पूर्व-प्राथमिक शिक्षक बच्चों के प्रारंभिक विकास के महत्वपूर्ण चरण में उनके साथ निकटता से कार्य करते हैं। इसलिए वे बच्चे के व्यवहार, संवाद, सामाजिक सहभागिता, खेल एवं सीखने के पैटर्न में दिखाई देने वाले बदलावों को प्रारंभिक स्तर पर पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्वतंत्रता दिवस हमें केवल देश की स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का अवसर नहीं देता, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि हर बच्चे को अपनी पहचान के साथ स्वीकार किए जाने, सीखने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चे भी तभी वास्तविक अर्थों में स्वतंत्रता का अनुभव कर सकते हैं, जब उनके व्यवहार को गलत समझने के बजाय समझा जाए, उनकी आवश्यकताओं को स्वीकार किया जाए और उन्हें उपयुक्त सहयोग दिया जाए।

इस अवसर पर विद्या भवन वेलनेस विभाग का यह प्रयास एक ऐसे विद्यालयी वातावरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ हर बच्चा केवल मुख्यधारा में शामिल न हो, बल्कि उसे समझा जाए, स्वीकार किया जाए और उसकी विशिष्ट क्षमताओं का सम्मान किया जाए।
क्योंकि किसी बच्चे के लिए स्वतंत्रता की शुरुआत शायद उस क्षण से होती है, जब कोई उसे बदलने से पहले उसे समझने का प्रयास करता है।

By Udaipurviews

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