गिर्वा क्षेत्र के विभिन्न खेतों में कृषि विभाग ने किया रैपिड रोविंग सर्वे

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 4 अगस्त। कृषि विभाग के अधिकारियों ने उपजिला गिर्वा के नयाखेड़ा, नाई, चैकरिया सहित विभिन्न गांवों में रैपिड रोविंग सर्वे कर मक्का, ज्वार, सब्जियों सहित विभिन्न फसलों में कीट एवं रोगों की स्थिति का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान अधिकांश फसलें कीट एवं रोगों से मुक्त पाई गईं। हालांकि, मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप देखा गया, लेकिन इसका स्तर आर्थिक क्षति स्तर (ईटीएल) से कम पाया गया।
सर्वे दल में शामिल कृषि अधिकारी (पौध संरक्षण) महेश अमेटा ने किसानों को फॉल आर्मीवर्म के जैविक नियंत्रण हेतु मेटाराइजियम एनिसोप्ली मित्र फफूंद का 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करने तथा मिट्टी व चूने को 9ः1 के अनुपात में अथवा सर्फ के घोल का मक्का के पोटों में प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने फसल चक्र अपनाते हुए अगले वर्ष मक्का के स्थान पर ग्वार, मूंग एवं उड़द जैसी फसलें बोने की सलाह भी दी, ताकि फॉल आर्मीवर्म का जीवनचक्र बाधित किया जा सके। कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. कुलदीप सुथार ने किसानों को फेरोमोन ट्रैप लगाकर नियमित निगरानी करने तथा फॉल आर्मीवर्म की लटों की प्रारंभिक अवस्था में एजाडिरेक्टिन 3000 पीपीएम का 3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी। कीट के अधिक प्रकोप व आर्थिक सीमांत स्तर की स्थिति में कीटनाशी क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी/ 200 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी/ 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करने की अनुशंसा की। साथ ही किसानों को एक ही रासायनिक समूह के कीटनाशी का लगातार उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई।

कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) डॉ. जयपाल यादव ने फसलों को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए ट्राइकोडर्मा मित्र फफूंद 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से जड़ों में प्रयोग करने व अनावश्यक यूरिया का प्रयोग नहीं करने की अनुशंसा की। रैपिड रोविंग सर्वे के दौरान वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक हेमलता नागदा एवं सोरन सिंह तथा विभिन्न किसान भी उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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