अमरचंद बड़वा की जयंती पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

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वक्ताओं ने कहा – अदम्य साहस और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था ही थी उनकी सबसे बड़ी कला

उदयपुर, 31 जुलाई। राजस्थान विद्यापीठ की अमरचंद बड़वा शोध पीठ एवं अमरचंद बड़वा स्मृति संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में अमरचंद बड़वा की जयंती के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह के  समापन दिवस पर शुक्रवार को प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय सभागार में अमरचंद बड़वा कालीन कला एवं संस्कृति विषय पर प्रबुद्धजन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और मेवाड़ की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं ने विस्तार से विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ इतिहासकार तेजसिंह तरूण ने कहा कि अमरचंद बड़वा का व्यक्तित्व केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी दूरदर्शिता, कला-प्रेम और सुरक्षा व्यवस्था की अनूठी समझ उन्हें इतिहास में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी जीवन में अमरचंद बड़वा पर लिखा गया उनका लेख प्रतिष्ठित पत्रिका कादम्बिनी में प्रकाशित हुआ था, जिसके बाद इतिहास और लेखन के प्रति उनकी रुचि और अधिक बढ़ी। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा के लिए बड़वा द्वारा निर्मित करवाई गई अद्भुत तोपें उनकी रणनीतिक सोच और उत्कृष्ट शिल्पकला का अनुपम उदाहरण हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्ञानमल सोनी ने की। उन्होंने अमरचंद बड़वा के प्रशासनिक कौशल, दूरदर्शी नेतृत्व और समाज के प्रति उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्य आज भी प्रेरणास्रोत हैं।

मंत्री डॉ. राजेन्द्रनाथ पुरोहित ने मेवाड़ राज्य के इतिहास तथा कर्नल टॉड द्वारा वर्णित ऐतिहासिक तथ्यों का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए अमरचंद बड़वा के योगदान को रेखांकित किया। वहीं लोकजन सेवा संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जयराज आचार्य ने वर्ष 1751 से 1775 के मध्य मेवाड़ के चार शासकों के साथ अमरचंद बड़वा के संबंधों, तत्कालीन कला-संस्कृति, रहन-सहन और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था पर शोधपरक व्याख्यान दिया।

लोकजन सेवा संस्थान एवं अमरचंद बड़वा स्मृति संस्थान के अध्यक्ष प्रो. विमल शर्मा तथा संस्थापक महामंत्री जयकिशन चैबे ने अतिथियों एवं प्रबुद्धजनों का स्वागत करते हुए आगामी आयोजनों की जानकारी साझा की।

इस अवसर पर विभौर रावल, लोकेश पालीवाल एवं सहयोगियों ने स्वर्गीय अमरचंद बड़वा के जीवन पर आधारित गीत का वीडियो प्रस्तुतीकरण किया, जिसे उपस्थितजनों ने सराहा। उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए विभौर रावल को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम का संयोजन अक्षय लोकजन पत्रिका के उप-संपादक डॉ. कुलशेखर व्यास ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पत्रिका के संपादक मनोहर लाल मुंदड़ा ने दिया। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई का दिन अमरचंद बड़वा की पुष्पांजलि के साथ-साथ शहीद सरदार ऊधम सिंह के बलिदान दिवस के रूप में भी स्मरणीय है, जिन्हें 31 जुलाई 1940 को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दी थी। समारोह के अंत में कवि श्रेणीदान चारण ने ओजपूर्ण काव्य पाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

संगोष्ठी में इन्द्रसिंह राणावत, रत्न मोहता, डॉ. सुरेन्द्र पालीवाल, हरिश्चंद तलरेजा, संध्या रानी शर्मा, यशवंत कुंवर सोनी, डॉ. कपिल जैन, शोएब कुरैशी, नारायण पालीवाल, डॉ. रविन्द्र देवड़ा, डॉ. रामाकांत शर्मा, कविता सागर, अविनाश खटीक, किशनलाल निमावत, ओमप्रकाश माली सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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