किराए के मकानों में रह रहे अधिकारी—कर्मचारी
उदयपुर, संवाद सूत्र। भारत सरकार के वित्त मन्त्रालय के अधीन आने वाले सेंट्रल एक्साइज और कस्टम विभाग के अधिकारियों के लिए उदयपुर में बनाए सरकारी आवास वर्षों से कोई काम नहीं आ रहे। सरकारी आवास के बावजूद अधिकारी और कर्मचारी किराए के आवासों में रह रहे हैं और उनके लिए विकसित सरकारी कॉलोनी जंगल में तब्दील होती नजर आ रही है। ऐसे में सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है और अधिकारी—कर्मचारी सरकार आवास होने के बावजूद किराया भत्ता उठा रहे हैं।
दरअसल भारत सरकार के सेंट्रल एक्साइज और कस्टम विभाग का दफ़्तर कुछ दशकों पूर्व उदयपुर में खुला था। शुरूआत में यह कार्यालय जिला कलकटर निवास के पास भट्टजी की बाड़ी स्थित एक मकान में संचालित होता रहा लेकिन कुछ वर्षों बाद हिरण मगरी सेक्टर-11 में अपने स्वयं के भवन में शिफ़्ट हो गया। इसके साथ ही सेंट्रल एक्साइज और कस्टम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास की समस्या को दूर करने के लिए एक योजना बनी। जिसके तहत विभाग ने हिरण मगरी सेक्टर-14 में एक कॉलोनी विकसित की तथा राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के एचआईजी और अन्य श्रेणियों के करोड़ों रुपयों के मकान ख़रीद लिए। किन्तु इन सरकारी आवासों में कोई भी अधिकारी—कर्मचारी शिफ़्ट नही हुआ। इस तरह यह मकान पिछले तीन दशकों से खाली पड़े हैं और वर्तमान में जर्जर हालात में पहुँच गए हैं। यहां तक बदमाश इन मकानों के दरवाजे, खिड़कियाँ, पंख़े, नल की टूटियाँ,अन्य सामान चुरा ले गए। रखरखाव के अभाव और सर्दी,गर्मी और वर्षा की मार के चलते इन सरकारी आवासों की दीवार तथा चारदीवारी जर्जर होने लगी है। इस मामले में कस्टम आफिसर राहुल नारंग का कहना है कि उन्हें तो इस बारे में जानकारी तक नहीं।
उदयपुर में सेंट्रल एक्साइज और कस्टम विभाग के अधिकारियों के बनाए करोड़ों के सरकारी आवास नहीं आ रहे काम
