उदयपुर, मेवाड़ के गौरव, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में भूपाल नोबल्स संस्थान के प्रताप चौक स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर विद्या प्रचारिणी सभा कार्यकारिणी एवं समस्त अधिष्ठाताओं सहित कर्मचारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की उनके अदम्य साहस, त्याग, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद किया।
संस्थान के प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि मेवाड़ के महिमामयी मेदिनी का इतिहास यहां के उदात्त चरित्र शूरवीरों, महान दानवीरों, सतमति सन्नारियों और श्रम साधक सपूतों के क्रीडा कलापों का कोश है। महाराणा प्रताप के युद्ध कौशल, वीरता, प्रशासनिक दक्षता, शौर्य, स्वतंत्रता प्रेम विपत्ति सहने की शक्ति को स्मरण कर प्रेरणा लेने से हम अपने जीवन एवं उदद््ेशयों को सार्थक बना सकते है।
राठौड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप राजतंत्रीय व्यवस्था में लोकतंत्र का व्यापक स्वरूप था जिसमें समाज का हर वर्ग समावेषि था जिसका जीवंत उदाहरण विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत की संसद भवन के बाहर लगी विशालकाय प्रतिमा बयान कर रही है ।
इस अवसर पर संयुक्त मंत्री राजेन्द्रसिंह ताणा, वित्त मंत्री शक्तिसिंह कारोही, कार्यकारिणी सदस्य कुलदीप सिंह ताल, महेन्द्रसिंह पाखण्ड, महेन्द्रसिंह पाटिया, कमलेश्वर सिंह कच्छेर, युवराजसिंह बेमला, वि.प्र.सभा सदस्य गजेन्द्र सिंह घटियावली, चन्द्रवीर करेलिया, सुदर्शनदेव सिंह कारोही, हर्षवर्धनसिंह बनकोडा, अतीतसिंह भाटी एवं प्रेसिडेन्ट प्रो.चेतनसिंह चौहान, पीजी डीन डॉ. प्रेमसिंह रावलोत, परिक्षा नियत्रंक मोहनसिंह राठौड़, विज्ञान संकाय अधिष्ठाता रितु तोमर, कला संकाय अधिष्ठाता माधवी राठौड़, वाणिज्य संकाय अधिष्ठाता राजेन्द्र सिंह शक्तावत ने पुष्पांजलि अर्पित कर त्याग एवं शौर्यता का स्मरण किया।
