उदयपुर। श्री तैलिक साहू समाज पंच महासभा (छः बैठक) द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर तीज का चौक स्थित माहेश्वरी सेवा सदन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का भक्तिमय वातावरण में भव्य समापन हुआ।
कथा के अंतिम दिन परम पूज्य पंडित अनन्तराम शास्त्री ने अपने श्रीमुख से दान की महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि सच्चे मन से किया गया दान व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्रों का वर्णन करते हुए शास्त्री जी ने उनके 16,108 विवाहों की पावन कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान सदैव अच्छे कार्य करने वालों की परीक्षा लेते हैं। जाम्बवती विवाह, स्यमंतक मणि की प्राप्ति, सत्यभामा विवाह तथा भौमासुर के वध के पश्चात 16 हजार 100 कन्याओं को मुक्त कराने की प्रेरणादायक कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने मंत्रमुग्ध होकर सुना।
कथा के समापन अवसर पर जब भजन “राधे-राधे कारो कारो पानी लागे” की प्रस्तुति हुई तो पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे। जयकारों और भजनों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
समाज अध्यक्ष एडवोकेट हेमेन्द्र पण्डियार ने कहा कि इस आयोजन ने समाज में एकता, समरसता और सनातन धर्म के प्रति आस्था का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि साहू समाज की सभी छह बैठकें,बलदेव बैठक, मंडी बैठक, गंगाराम जी बैठक, मेवाड़ बैठक, बेदला बैठक एवं भुवाणा बैठक,इस आयोजन में एकजुट होकर शामिल हुईं, जो समाज की संगठित शक्ति का प्रतीक है।
कथा समापन कार्यक्रम में सभी बैठकों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। कथा संयोजक जगदीश चन्द्र पण्डियार ने आयोजन की सफलता के लिए सभी समाजबंधुओं, सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
महामंत्री कन्हैयालाल नैणावा ने जानकारी देते हुए बताया कि पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत 15 जून 2026 को खाटू श्याम संध्या का आयोजन किया जाएगा, जबकि 16 जून 2026 को ओसवाल भवन में महाप्रसादी का आयोजन होगा। इस अवसर पर समाज के सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे जाएंगे तथा समाजबंधु बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके साथ ही मंगलवार को भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें समाजजन एवं श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल होकर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट करेंगे।
दान, धर्म और एकता का संदेश देकर संपन्न हुई श्रीमद्भागवत कथा, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
