अशोक नगर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

उदयपुर, 28 मई। शहर के अशोक नगर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर पूज्य पुष्कर दास महाराज के सान्निध्य में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की वेला आते ही पूरा पंडाल “नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भजन से गूंज उठा। श्रद्धालु भजनों पर झूम उठे और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के दौरान महाराजश्री ने कहा कि आज समाज में राग और द्वेष तेजी से बढ़ रहा है। मनुष्य चाहे कितने भी मंदिर दर्शन, तीर्थ यात्रा, सत्संग और सत्कर्म कर ले, लेकिन यदि उसके जीवन से राग-द्वेष समाप्त नहीं होता तो उन सत्कर्मों का वास्तविक फल प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि सत्संग मन के विकारों को दूर कर आत्मा को निर्मल बनाता है तथा भागवत कथा समाज को जोडऩे का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम अत्यंत सहज और सरल है, जिसे कोई भी व्यक्ति कभी भी स्मरण कर सकता है। नाम जप से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मानव जीवन को दुर्लभ बताते हुए महाराजश्री ने कहा कि यह जन्म बार-बार नहीं मिलता, इसलिए समय रहते दान, पुण्य और सत्कर्म कर लेने चाहिए। जो व्यक्ति इस जीवन में धर्म और सेवा के कार्य करता है, वही अपने अगले जीवन को भी श्रेष्ठ बनाता है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराजश्री ने भगवान विष्णु के मत्स्य, कच्छप, वराह और मोहिनी अवतार का सुंदर वर्णन किया तथा भागवत में वर्णित 24 गुरुओं की व्याख्या कर श्रद्धालुओं को जीवनोपयोगी संदेश दिए। उन्होंने कहा कि विवाह और शुभ अवसरों पर उपहार स्वरूप रामायण, गीता और भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथ भी भेंट किए जाने चाहिए ताकि हर घर में संस्कारों और धर्म का प्रकाश बना रहे। महाराजश्री ने कहा कि आज के समय में लोग बच्चों को भौतिक सुविधाएं तो दे रहे हैं, लेकिन संस्कार देना भूलते जा रहे हैं। “भक्ति रूपी सीता तभी प्राप्त होगी, जब अहंकार रूपी धनुष टूटेगा” — इस संदेश के माध्यम से उन्होंने विनम्रता और भक्ति का महत्व समझाया। दशम स्कंध की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे ही वासुदेव जी ने भगवान श्रीकृष्ण को सिर पर धारण किया, उनकी बुद्धि पवित्र हो गई तथा सभी बेडिय़ां और ताले स्वत: खुल गए। महाराजश्री ने कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक अपराध पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग बेटियों को जन्म लेने से पहले ही समाप्त कर देते हैं, वे मानवता और धर्म दोनों के विरुद्ध कार्य करते हैं।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य कर आनंद मनाया तथा जय श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कथा के अंत में व्यासपीठ पर बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण एवं वासुदेव जी की आकर्षक एवं मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने सभी भक्तों का मन मोह लिया। मुख्य यजमान अजय  राज आचार्य द्वारा सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप माखन-मिश्री, पंचामृत एवं पंजेरी वितरित की द्य वि_ल वैष्णव ने बताया शुक्रवार को कथा में गोवर्धन लीला के प्रसंग का वर्णन किया जाएगा ।

By Udaipurviews

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