शिक्षा, चिकित्सा, कला, संस्कृति व खेल क्षेत्र की विभूतियो का किया सम्मान
उदयपुर, 11 जुलाई। भारतीय ज्ञान परम्परा में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम की भावना केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाने का आधार रही है। इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करते हुए एकेडमी ऑफ वेलबीइंग सोसायटी की ओर से शनिवार को सहेली मार्ग स्थित होटल आमंत्रा के सभागार में सम्मान समारोह एवं 20वीं वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षा, चिकित्सा, कला, संस्कृति और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी.एल. चौधरी, संस्था की संस्थापक प्रो. विजय लक्ष्मी चौहान तथा प्रो. पायल चंदेल ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डॉ. शैली श्रीवास्तव ने गणपति नृत्य नाटिका की आकर्षक प्रस्तुति देकर वातावरण को आध्यात्मिक रंग प्रदान किया।
संस्था की संस्थापक प्रो. विजय लक्ष्मी चौहान ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि एकेडमी ऑफ वेलबीइंग सोसायटी पिछले 20 वर्षों से समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य केवल सम्मान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और समग्र कल्याण की भावना को विकसित करना है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परम्परा का उल्लेख करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार ‘लोकसंग्रह’ और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ है। आज मानवीय संवेदनाएं लगातार क्षीण हो रही हैं और संयुक्त परिवारों का स्थान एकल परिवारों ने ले लिया है। भौतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद व्यक्ति मानसिक शांति और आत्मिक संतोष से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में भारतीय ज्ञान परम्परा हमें परिवार, समाज और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि एकेडमी ऑफ वेलबीइंग सोसायटी समाज के विभिन्न स्तरों पर लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और पारिवारिक सुख-समृद्धि को बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है।
इस अवसर पर डोना पालीवाल ने संस्था के दस वर्षों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी दी।
समारोह में वेलबीइंग सोसायटी द्वारा प्रकाशित जर्नल का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही शिक्षा, चिकित्सा, खेल, संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले डॉ. प्रेम भंडारी, डॉ. कमला कंवरानी, श्रीमती प्रीति भार्गव, डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. श्वेता शर्मा, लक्ष्मी रमण, डॉ. क्रिस्टी पॉल एवं शैली श्रीवास्तव को डिस्टिंग्विश्ड वेलबीइंग ऑनर्स-2026 से सम्मानित किया गया। वहीं प्रो. सरवत खान, डॉ. दीपेंद्र सिंह, डॉ. देवेंद्र हीरन, प्रो. सरोज गर्ग, डॉ. सिद्दीका हुसैन, डॉ. प्रीति शर्मा, डॉ. मीना बाबेल, सिंपल गौर तथा डॉ. अंजू गिरी को वेलबीइंग विजनरी अवार्ड प्रदान किया गया। इसके अलावा प्रो. सुनीता मुर्डिया, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. रचना राठौड़, कृष्णकांत कुमावत, डॉ. जय सिंह जोधा, डॉ. हरीश चौबीसा, डॉ. कुसुम शर्मा, डॉ. शबनम टोबवाला एवं डॉ. नेहा मंडावत को वेलबीइंग एक्सीलेंस अवार्ड-2026 से नवाजा गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमृता बोकाड़िया, डॉ. डॉली मोगरा ने किया, जबकि अंत में प्रो. कल्पना जैन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
