प्रधानाचार्य मोहन सोनी ने बदली विद्यालय की तस्वीर

 “दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो बदलाव संभव है” — ग्राम चंगेड़ी के विद्यालय ने पेश की मिसाल
 
फतहनगर। “यदि सफलता के रंग भरने हैं, तो स्वयं को भी उन रंगों में रंगना पड़ता है।” इस विचार को साकार कर दिखाया है राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चंगेड़ी (मावली) के प्रधानाचार्य श्री मोहन सोनी ने। उनके नेतृत्व, दूरदृष्टि और विद्यालय के प्रति समर्पण ने एक साधारण विद्यालय को विकास, नवाचार और अनुशासन की नई पहचान दिलाई है।
 
वर्ष 2018 से पहले विद्यालय की स्थिति सामान्य थी, लेकिन पिछले सात वर्षों में यहां जो परिवर्तन हुआ है, वह क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानाचार्य मोहन सोनी के सकारात्मक प्रयासों से विद्यालय में न केवल भौतिक संसाधनों का विकास हुआ, बल्कि शिक्षा का वातावरण भी प्रेरणादायी बना है।
 
विद्यालय स्टाफ, ग्रामवासियों, ग्राम पंचायत और भामाशाहों के सहयोग से स्कूल परिसर का व्यापक कायाकल्प किया गया। विद्यालय की पुरानी कक्षाओं की मरम्मत कर उन्हें नया स्वरूप दिया गया। सभी कमरों में प्लास्टर, रंग-रोगन और लाइट फिटिंग का कार्य करवाया गया। दरवाजों, खिड़कियों और शौचालयों की मरम्मत के साथ स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
 
विद्यालय परिसर के बाहर और भीतर तारबंदी करवाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। परिसर में हरियाली बढ़ाने के लिए गुलमोहर, गुलाब, चंपा, कनेर, रातरानी और सजावटी पौधे लगाए गए, जिससे विद्यालय का वातावरण आकर्षक और प्रेरणादायी बन गया है।
 
स्टाफ साथियों के सहयोग से चौकसी संस्थान उदयपुर द्वारा विद्यालय में फर्नीचर उपलब्ध करवाया गया। आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हुआ। प्रधानाचार्य कक्ष में टाइल्स, कार्यालय हेतु नई कुर्सियां, कम्प्यूटर, प्रिंटर तथा विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे और ऑटोमेटिक बेल जैसी सुविधाएं स्थापित की गईं। इससे विद्यालय में अनुशासन और व्यवस्थापन को नई दिशा मिली।
ग्राम पंचायत के सहयोग से विद्यालय में एक विशाल हॉल, 6 फीट ऊंची चारदीवारी, प्रार्थना सभा स्थल, ओपन जिम तथा डोम में लगभग 30×60फीट के इंटरलॉकिंग कार्य करवाए गए। वहीं भामाशाहों के सहयोग से विद्यालय का आकर्षक मुख्य प्रवेश द्वार, पेयजल हेतु वाटर डिस्पेंसर, साइकिल स्टैंड, पंखे, सोफासेट, साउंड सिस्टम, इन्वर्टर और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गई।
विद्यालय का परीक्षा परिणाम भी लगातार उत्कृष्ट रहा है। बोर्ड परीक्षाओं में विद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण और शत-प्रतिशत परिणाम देकर अपनी अलग पहचान बनाई है। इसके लिए प्रधानाचार्य मोहन सोनी स्वयं और स्टाफ के साथ विद्यार्थियों के अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखते हैं तथा कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
कोरोना काल में भी श्री सोनी ने विद्यालय हित में सक्रिय भूमिका निभाई और श्रेष्ठ कार्यों के लिए उन्हें दो बार उपखंड स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। वे वर्ष 1990 से 2011 तक स्थानीय विद्यालयों में तथा उसके बाद भी शिक्षा क्षेत्र में निरंतर सेवाएं देते रहे हैं। उनके कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम है।
विद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण, नैतिक एवं चारित्रिक मूल्यों का विकास, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जाता है। यही कारण है कि आज यह विद्यालय क्षेत्र के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
ग्रामवासियों का कहना है कि प्रधानाचार्य मोहन सोनी ने अपने जुनून, मेहनत और सकारात्मक सोच से यह साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व ईमानदार हो और समाज का सहयोग मिले, तो किसी भी विद्यालय की तस्वीर बदली जा सकती है।
By Udaipurviews

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