हरित क्रांति का अनूठा ‘वागड़ मॉडल’ – माही के टापुओं और अरावली की कंदराओं में ‘सीड बॉल व गुलैल’ से बीजारोपण
समय की मांग है दुर्गम अंचलों में जैव-विविधता संरक्षण और सघन वनीकरण की एक अनूठी और प्रभावी पहल - डॉ. दीपक आचार्य बांसवाड़ा : वसुंधरा को हरा-भरा बनाने के प्रारंभिक तरीके जहाँ थकाऊ और खर्चीले साबित हो रहे हैं, वहीं बांसवाड़ा के अद्वितीय भूगोल को देखते हुए ‘सीड बॉल और गुलैल’ की प्राचीन व आधुनिक मिश्रित तकनीक पर्यावरण संरक्षण का एक गेम-चेंजर मॉडल बन सकती है। माही के अथाह जलभराव में तैरते सैकड़ों वीरान टापू और अरावली की दुर्गम चोटियाँ इस तकनीक से कल्पवृक्षों के वनों में तब्दील हो सकती हैं। इस दिशा में यह अनूठी और कारगर तकनीक उपयोग…
