पुण्य के सामने, कंस की शक्ति हारी‘आचार्य ज्ञानचन्द्र महाराज
उदयपुर। न्यू भूपालपुरा सिथत अरिहंतनगर में ’जैनाचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने चातुर्मास प्रवचन के दौरान कहा कि श्री कृष्ण जीवन, वर्तमान के लोगों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। वे क्षायिक सम्यक् दृष्टि थे। एक भव करके 12 वें उमभ नामक तीर्थंकर बनने वाले हैं जबकि श्री कृष्ण के भव में एक नवकारसी, पोरसी, सामायिक तक नहीं की, लेकिन उनका व्यवहार, आचरण इतना न्याय युक्त और धार्मिक था कि वे तीर्थंकर बनने जा रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में न्याय और धर्म की सुरक्षा के लिए साम, दाम, दंड, भेद को भी अपनाया था। यह आज के युग में समझने की…
