डिजिटल भ्रम का युग: पैरासोशल रिश्ते और बढ़ती चुनोतियाँ
कभी रिश्ते आँखों की भाषा से पहचाने जाते थे, आज स्क्रीन की रोशनी में गढ़े जा रहे हैं। जिस तकनीक ने मनुष्य को दुनिया से जोड़ा है, उसी तकनीक ने उसे अपनों से भी काटना शुरू कर दिया है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने जीवन को सुविधाजनक तो बनाया, लेकिन इसी सुविधा की चकाचौंध में समाज एक ऐसे डिजिटल भ्रम के युग में प्रवेश कर गया है, जहाँ सच्चे रिश्तों की जगह आभासी अपनापन ले रहा है। यही आभासी अपनापन पैरासोशल रिश्ता है, जो आज फॉर्ड की संभावनाएं बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है।…
