बल्क वेस्ट जनरेटरों का पंजीकरण अनिवार्य, कलक्टर ने जारी किए कड़े निर्देश

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 28 अक्टूबर। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उदयपुर जिले में प्रशासनिक मुस्तैदी तेज हो गई है। स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान के निर्देशों और माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने जिले के सभी संबंधित संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आवासीय सोसायटियों के लिए बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया के सुचारू संचालन और मॉनिटरिंग के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी विनय कट्टा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

कौन हैं बल्क वेस्ट जनरेटर (पात्रता मानदंड)
नियमों के अनुसार, जिले का कोई भी संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या आवासीय परिसर जिनका कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक हो, प्रतिदिन का जल उपभोग 40,000 लीटर या उससे अधिक हो,  प्रतिदिन उत्पन्न होने वाला ठोस अपशिष्ट 100 किलोग्राम या उससे अधिक हो उसे बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में माना जाएगा और पंजीकरण कराना होगा।

इन्हें कराना होगा पंजीकरण
संस्थागत श्रेणी में केंद्र व राज्य सरकार के विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, विश्वविद्यालय, कॉलेज, स्कूल और शोध संस्थान। व्यावसायिक श्रेणी में होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, मॉल, औद्योगिक इकाइयां, विवाह स्थल, रेस्तरां, फूड कोर्ट, ऑडिटोरियम और थोक मंडियां तथा आवासीय श्रेणी में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, हाउसिंग सोसायटियां और बड़े आवासीय परिसर इस दायरे में आते हैं।

ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर
सभी पात्र इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर समयबद्ध तरीके से आवेदन प्रस्तुत करना होगा। सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, सभी आवश्यक पंजीकरण और पोर्टल अपडेशन 31 अक्टूबर, 2026 तक पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आवेदन के लिए प्रतिष्ठान का विवरण, संपत्ति कर दस्तावेज या भवन स्वीकृति योजना, जल उपभोग बिल तथा अधिकृत प्रतिनिधि की जानकारी तैयार रखनी होगी।

पंजीकरण के बाद निभाने होंगे ये प्रमुख दायित्व
नोडल अधिकारी विनय कट्टा ने बताया कि पंजीकरण के बाद सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों को कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा। कचरे को चार श्रेणियों गीला, सूखा, स्वच्छता संबंधी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट में अलग-अलग रखना होगा। गीले कचरे का परिसर के भीतर ही वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करना होगा और जहां यह संभव नहीं है, वहां विस्तारित बल्क वेस्ट जनरेटर उत्तरदायित्व के तहत स्थानीय निकाय से आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त कर नियमों का पालन करना होगा। जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मण्डल ने सभी नागरिकों और व्यावसायिक संगठनों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं ताकि उदयपुर को एक स्वच्छ, स्वस्थ और प्रदूषणमुक्त पर्यावरण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!