गणपति बाप्पा का धूमधाम से किया विसर्जन
उदयपुर, 6 सितम्बर।
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर उदयपुर संभागभर में गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दस दिनों तक घर-घर और सार्वजनिक पंडालों में विराजमान गणपति बाप्पा का आज धूमधाम से विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही विभिन्न तालाबों, झीलों और घाटों पर जुटनी शुरू हो गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूरे उत्साह और भावनाओं के साथ अपने आराध्य को विदाई दी।
शहर के मुख्य मार्गों पर गणपति विसर्जन की झांकियों, बैंडबाजों और ढोल-नगाड़ों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे भक्तों ने नृत्य करते हुए गणपति को विदाई दी। जगह-जगह श्रद्धालुओं को शीतल पेय और प्रसाद वितरण की व्यवस्थाएं की गई थीं। विसर्जन यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। नगर निगम और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विसर्जन स्थलों पर स्वच्छता और व्यवस्थाओं का जिम्मा संभाला।

उदयपुर शहर में फतहसागर, पिछोला और स्वरूपसागर झीलें प्रमुख विसर्जन स्थल रहीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु झील किनारों पर जुटे और पारंपरिक विधि-विधान के साथ गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी तालाबों और नदियों पर भक्तों ने अपने गणपति को विदा किया।
इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण की अपील भी देखने को मिली। कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने लोगों को परंपरागत मिट्टी की मूर्तियों के विसर्जन के लिए प्रेरित किया। साथ ही, कृत्रिम तालाबों और टैंकों की व्यवस्था की गई ताकि झीलों का प्रदूषण रोका जा सके। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इन कृत्रिम तालाबों का उपयोग करते हुए पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी रहा। विभिन्न समुदायों के लोग एकजुट होकर इस पर्व में शामिल हुए। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारों के साथ श्रद्धालुओं ने अगले साल फिर से अपने प्रिय बप्पा के आगमन की कामना की।

धार, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में भी गणपति विसर्जन का उत्साह देखने को मिला। स्थानीय तालाबों और नदियों पर ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी इलाकों तक भक्तों की भीड़ उमड़ी। जगह-जगह ढोल-ढमाकों और नाच-गानों के बीच गाजे-बाजे के साथ गणपति की शोभायात्राएं निकाली गईं।
इस बार कई पंडालों में थीम आधारित सजावट ने भी आकर्षित किया। कहीं अयोध्या में भव्य राम मंदिर की झलक तो कहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता पंडाल लोगों का ध्यान खींचता रहा। सामाजिक समरसता का यह पर्व भक्ति, उल्लास और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ।
आखिरकार रात तक चले गणपति विसर्जन के साथ उदयपुर संभाग में गणपति महोत्सव का समापन हुआ। झीलों की लहरों और भक्तों के आंसुओं के बीच जब गणपति की प्रतिमाएं डूबीं, तो पूरे माहौल में भावुकता और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। भक्तों ने बप्पा से मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना की और अगले वर्ष पुनः धूमधाम से आगमन की आशा व्यक्त की।
