नौ साल बाद परिजनों से मिली बिहार की लक्ष्मी

मृत मान चुके थे परिजन, उदयपुर के आशाधाम की देखरेख में मिला नया जीवन
उदयपुर। बिहार की लक्ष्मी की कहानी सुनकर हैरानी भी होती है और खुशी भी। नौ साल पहले विक्षिप्त अवस्था में मिली एक महिला को आखिरकार उसका परिवार मिल गया। माता—पिता को सामने देखकर उसकी आंखें चमक उठी। पिछले नौ साल से उदयपुर के आशाधाम में रह रही लक्ष्मी के विदाई के समय सभी के आंखों में आंसू थे लेकिन खुशी के। लक्ष्मी के परिजनों ने आशाधाम की संस्थापिका सिस्टर डेमियन और उनके सहयोगियों का शुक्रिया अदा किया, जिसके चलते उनकी लक्ष्मी मिल पाई।
सिस्टर डेमियन बताती हैं कि नवंबर 2014 में लक्ष्मी उदयपुर के उदयापोल बस स्टैण्ड के पास नारी निकेतन के कर्मचारियों को विक्षिप्त अवस्था में मिली थी। जिला विधिक न्यायाधीकरण के जरिए उन्हें आशाधाम आश्रम भेजा गया। जब वह यहां आई तो बेहद उग्र अवस्था में रहती थी। काउंसलिंग के दौरान अकसर यही कती थी कि उसके बच्चों की हत्या कर दी गई है और वह अपनी जान बचाकर ट्रेन के जरिए यहां पहुंच गई। तब वह अपनी पहचान भूल चुकी थी।
नौ साल लगे सामान्य होने में
आशाधाम आश्रम में रहने तथा वहां हो रही उसकी देखभाल तथा काउंसलिंग का नतीजा यह रहा कि वह लगातार मानसिक स्थिति से उबरने लगी। यहां धीरे—धीरे उसका नियमित उपचार जारी रहा। उसकी स्थिति में सुधार आया तो वह आशाधाम के सहयोगियों से अच्छे से बात करने लगी। आश्रम में रहकर वह खाना पकाने, साफ—सफाई करने में भी मदद करने लगी। इसी बीच एक दिन उसने बताया कि वह बिहार के सहरसा जिले के बिहरा गांव की है। हालांकि वह अपने घर का पता भूल चुकी थी।
गांव के मुखिया से संपर्क करने पर परिजनों का पता लगा
सिस्टर डेमियन बताती हैं कि बिहरा गांव का पता लगने पर आशाधाम की कार्यकर्ता उसके परिजनों की तलाश में जुट गई। गूगल के जरिए बिहरा गांव के मुखिया के मोबाइल नंबर मिल गए तथा उनसे संपर्क किया। जिसके जरिए उसके परिजनों का पता चल पाया। जिसके बाद लक्ष्मी के परिजनों को उसकी फोटो भेजी गई और परिजनों के फोटो यहां मंगवाए गए। जब लक्ष्मी तथा परिजनों ने एक—दूसरे को पहचान लिया तब उनकी मोबाइल से लाइव बात कराई गई। नौ साल में लक्ष्मी अपनी क्षेत्रीय भाषा बोलने और समझने में परेशानी आई लेकिन सभी एक—दूसरे को पहचान चुके थे।
मृत मान चुके थे परिजन
लक्ष्मी को लेने उसके बेटे रामबोल कुमार अपने रिश्तेदार सदानंद के साथ यहां अपनी मां लक्ष्मी को लेने आए तो उन्होंने बताया कि वह अपनी मां को मृत मान चुके थे। आज उनकी मां स्वस्थ और जीवित है तो सिस्टर डेमियन और आशाधाम की सेवा की बदौलत। उन्होंने इसके लिए सिस्टर डेमियन और आशाधाम के कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने बताया कि उनके तीनों बच्चे जीवित हैं और सलामत हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। जो कहानी लक्ष्मी ने यहां नौ साल पहले बताई थी वह गलत थी। सोमवार को लक्ष्मी अपने परिजनों के साथ उदयपुर से रवाना हो गई।

By Udaipurviews

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