गुरु पुष्कर का कहना था सत्संग से होता है मानवीय गुणों का विकासःडॉ. सुरेन्द्र मुनि

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 22 अक्टूबर। देवेन्द्रधाम स्थित महावीर समवशरण में आयोजित गुरु पुष्कर जन्म जयंती सप्ताह के अंतर्गत भक्तामर अनुष्ठान के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि मानव जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए सत्संग रामबाण औषधि का कार्य करता है। मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसमें निहित शारीरिक, मानसिक और आत्मिक ऊर्जा का हमें सदुपयोग करना चाहिए, अन्यथा प्राप्त दुर्लभ शक्तियां पुनः विलीन हो जाती हैं। इसके लिए गुरुजनों का सत्संग अत्यंत आवश्यक है, जो आत्मशक्ति का भान कराता है, प्रमाद से बचाता है और सत्कर्म करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भारत भूमि त्याग और तपस्या की आध्यात्मिक भूमि रही है। गुरु के सान्निध्य में श्रवण, वांचन और चिंतन करने से आत्मिक शक्तियां स्वतः जागृत होती हैं।
सभा में डॉ. दिव्य प्रभा ने गुरु एवं माता-पिता को तीर्थ स्वरूप बताते हुए उनकी सेवा में समर्पित रहने का संदेश दिया। पुष्कर जयंती के पंचम दिवस के अवसर पर गुरु पुष्कर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित जन समूह ने प्रश्नोत्तरी के माध्यम से गुरु पुष्कर के जीवन दर्शन वृत्तांत को समझा एवं अपने जीवन में प्रेरणा प्राप्त की, विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
प्रवचन के समापन सत्र में डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि सत्संग का वास्तविक तात्पर्य आत्मा के समीप रहना है। सत्संग रूपी नौका में बैठकर आत्मा भवसागर से पार होकर मोक्ष की प्राप्ति कर लेती है। सत्संग के प्रभाव से बड़े-बड़े डाकू भी साधु बन गए।
इस दौरान श्रीपाल राजकुमार के चरित्र वर्णन के माध्यम से जीवन को उन्नत बनाने की प्रेरणा दी गई। कार्यक्रम में सूरत मकराना अजमेर पटियाला पंजाब आदि क्षेत्रों से  पधारे हुए सभी अतिथियों का समाज द्वारा स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!