उदयपुर में रविवार को लोकार्पित होगा ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’, महान सूत्रधार मंडन की स्मृति को समर्पित अनूठा स्मारक

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स्थापत्य, विज्ञान और सृजन का संगम बनेगा टॉवर; 15वीं शताब्दी के विख्यात वास्तुविद को समर्पित होगी विरासत
उदयपुर, 17 अक्टूबर। भारतीय स्थापत्य परंपरा के महान आचार्य सूत्रधार मंडन की स्मृति को समर्पित ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ का लोकार्पण रविवार, 18 अक्टूबर को शाम 6 बजे शोभागपुरा, उदयपुर में किया जाएगा। उदयपुर के स्थापत्य और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक विशिष्ट पहचान जोड़ने की परिकल्पना के साथ तैयार यह स्मारक वास्तुविदों, शिल्पियों और सृजनशील मस्तिष्कों के योगदान को सम्मान देने का संदेश देगा।

लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि उदयपुर के महापौर श्री पारस सिंघवी होंगे। उदयपुर विकास प्राधिकरण की अनुमति से निर्मित इस टॉवर की परिकल्पना आर्किटेक्ट सुनील एस. लड्ढा और आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी ने की है। इसके निर्माण से जुड़े इस प्रयास का उद्देश्य स्थापत्य कला को केवल भवन निर्माण तक सीमित न रखते हुए उसे भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

आर्किटेक्ट सुनील एस. लड्ढा की पहल तथा डॉ. विनोद जेके पोरवाल ट्रस्ट, उदयपुर के सहयोग से इस टॉवर का निर्माण लगभग तीन महीने किया गया है। इसमें टाइम कैप्सूल भी स्थापित किया गया है।

महाराणा कुंभा के काल के महान वास्तुविद को समर्पण : सूत्रधार मंडन 15वीं शताब्दी के विख्यात वास्तुविद और स्थापत्य ग्रंथों के रचयिता थे। उनका नाम मेवाड़ की समृद्ध स्थापत्य परंपरा और वास्तुशास्त्रीय ज्ञान के साथ जुड़ा है। उनसे संबद्ध राजवल्लभ वास्तुशास्त्र, प्रासादमंडन, रूपमंडन, देवता मूर्ति प्रकरण तथा अन्य ग्रंथ भारतीय स्थापत्य, मूर्तिकला और नगर नियोजन की परंपरा के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।

लड्ढा ने बताया कि आर्किटेक्ट्स टॉवर के माध्यम से सूत्रधार मंडन सहित उन सभी शिल्पियों, सूत्रधारों, वास्तुविदों और रचनाकारों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने अपनी कल्पनाशीलता, ज्ञान और कौशल से सभ्यताओं को आकार दिया। यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय स्थापत्य की गौरवशाली परंपरा से परिचित कराने का भी माध्यम बनेगी।

स्थापत्य और विज्ञान का आकर्षक संगम : टॉवर की परिकल्पना में स्थापत्य सौंदर्य के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी महत्व दिया गया है। इसमें प्रस्तावित ऊर्ध्वाधर धूप घड़ी सूर्य की छाया के माध्यम से समय की अवधारणा और खगोलीय विज्ञान को समझने का रोचक अवसर प्रदान करेगी। इस प्रकार यह स्मारक शहर की पहचान में एक नया आयाम जोड़ने के साथ ज्ञान और जिज्ञासा का केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

उन्होंने बताया कि समारोह में सूत्रधार मंडन के वंशज भी मौजूद रहेंगे। प्रशस्ति के लिए श्री विश्वकर्मा मेवाड़ा सुथार समाज विकास संस्थान, उदयपुर और अखिल मेवाड़ जांगिड़ सुथार समाज विकास संस्थान, उदयपुर का सौजन्य रहेगा।

आयोजकों ने शहरवासियों, वास्तुविदों, कला एवं स्थापत्य प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों से समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है।

By Udaipurviews

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