उदयपुर। आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी श्रीजी ने जीवन में संपत्ति और सद्गुणों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस संपत्ति को मनुष्य आज सुख का साधन मानता है, वही कल उसके लिए दुख और चिंता का कारण बन सकती है। इसलिए भौतिक संपत्ति से अधिक आत्मिक संपदा को महत्व देना चाहिए।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि संपत्ति प्राप्त करने के लिए मनुष्य लगातार तनाव में रहता है। अधिक से अधिक लाभ कैसे प्राप्त हो, प्राप्त संपत्ति को सुरक्षित कैसे रखा जाए और उसका उपयोग पुण्य कार्यों में हो रहा है या नहीं, यह चिंतन भी उसे परेशान करता रहता है। उन्होंने कहा कि संपत्ति केवल पुरुषार्थ से नहीं, बल्कि पुण्य के उदय से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसकी बाहरी संपत्ति या दिखावे से नहीं, बल्कि उसके अंदर के भाव, गुण, नम्रता, कोमलता, विनय और विवेक से होती है। किसी को चुप करा देना होशियारी नहीं, बल्कि अवगुण है। जीवन में सरलता अपनाने और शांत रहकर परिस्थितियों को स्वीकार करने का संकल्प कर लिया जाए तो व्यक्ति को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी द्वारा मंगलाचरण से किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने साध्वी श्रीजी के आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
संपत्ति नहीं, सद्गुण ही जीवन की वास्तविक पूंजीःसाध्वी विद्यतुप्रभाश्री
