सखी वन स्टॉप सेंटर ने संवेदनशीलता से निभाई जिम्मेदारी, परिजनों से मिलवाया
उदयपुर। कभी-कभी खामोशी सबसे ज़्यादा दर्द बयां करती है। ऐसा ही एक मार्मिक मामला सामने आया, जब एक महिला बोलने में असमर्थ अवस्था में 15 दिन पहले भटकती अवस्था में मिली, जिसकी आंखों में डर, असहायता और अपनों से बिछड़ने का गहरा दर्द साफ झलक रहा था। वह शब्दों में कुछ कह नहीं पा रही थी, लेकिन उसके इशारे उसकी पूरी मनोदशा बयान कर रहे थे। उसे सुरक्षित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर लाया गया, जहां केंद्र प्रबंधक किरण पटेल, लीगल परामर्शदाता अनिता पंवार, सामाजिक परामर्शदाता रेखा जीनगर, केस वर्कर सुमित्रा चौबीसा व सुशीला गमेती ने बेहद धैर्य और मानवीय संवेदना के साथ उससे संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। वह हर सवाल का जवाब इशारों, आंखों की भाषा और भाव-भंगिमाओं से देती रही। उसके हाव-भाव से यह स्पष्ट था कि वह अपने परिवार से बिछुड़ चुकी है और गहरे मानसिक तनाव में है। महिला अधिकारिता विभाग की और से भुवाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित सखी सेंटर की टीम ने इसको सिर्फ आश्रय ही नहीं दिया, बल्कि उसे अपनापन भी दिया। उसके लिए भोजन, कपड़े और मानसिक सहयोग की व्यवस्था की गई। सबसे बड़ी चुनौती थी, उसके परिजनों तक पहुंचना। उसकी सीमित जानकारी, बोलने में असमर्थता और पहचान से जुड़े अभाव के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी। लगातार प्रयास, संभावित ठिकानों की जांच, स्थानीय नेटवर्क और प्रशासनिक सहयोग के बाद आखिरकार परिजनों का सुराग मिला। उसकी वीडियो कॉल से परिजनों से बात कराई। इसके बाद परिजन सखी सेंटर पहुंचे और उसको देखा, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आंखों से बहते आंसू, कांपते हाथ और लंबे समय बाद मिली राहत, वह पल हर किसी की आंखें नम कर गया।
बोलने में असमर्थ, इशारों से व्यक्त की मनोदशा
