उदयपुर के रिकार्ड होल्डर सक्का ने बनाई समुद्री नमक के दाने से भी छोटी वर्ल्ड कप ट्रॉफी

दावा- हवा से भी हल्की, सोने से बनाया आर्टवर्क
उदयपुर: लेकसिटी उदयपुर के स्वर्ण शिल्पी वर्ल्ड रिकार्ड होल्डर डॉ. इकबाल सक्का ने क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 की विजेता टीम को दी जाने वाली क्रिकेट ट्रॉफी की कलाकृति बनाई है। उसका दावा है कि यह ट्राफी हवा से भी हल्की है। इसे समुद्री नमक के दाने से भी छोटा रूप देकर सोने से तैयार की गई है।
डॉ. सक्का ने कहा कि यह वजन में इतनी हल्की है कि इसे किसी भी तराजू से तोल लिया जाए, वजन 0 ग्राम ही बताएगी।  उनका कहना है कि उन्होंने इसे समुद्री नमक के दाने से भी छोटे रूप में बनाया है। डॉ. सक्का ने बताया कि उन्होंने विनर टीम को मिलने वाली ट्रॉफी की तरह इसे हूबहू रूप दिया है। यह सोने से बनाई गई है और लेंस की मदद से ही देखी जा सकेगी।
सक्का ने बताया कि उन्होंने असली ट्रॉफी की तरह इसे तैयार किया है। इसमें बैट, गोल्डन कैप, स्टंप और बॉल बनाई गई है। उन्होंने इस ट्रॉफी को छोटे से क्रिकेट मैदान में सजाया है।
वर्ल्ड कप विजेता टीम की दी जाए यह ट्रॉफी, पीएम को लिखा पत्र
अब सक्का चाहते है कि उनकी बनी ये कलाकृति वर्ल्ड कप की विनर टीम को दी जाए। यह ट्रॉफी विनर टीम को भारत सरकार की तरफ से भेंट कराई जाए। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखा है। सक्का ने बताया कि इस सोने की कलाकृतियों को बनाने में 5 दिन का समय लगा। इसका वजन मात्र 0 पॉइंट 00 मिलीग्राम है।
सक्का के नाम सौ से अधिक विश्व रिकॉर्ड
सक्का ने बताया कि उनके नाम 100 से अधिक विश्व रिकॉर्ड से दर्ज हो चुके हैं। वे कहते हैं कि देश के लिए ही कलाकृतियां बना कर मैं देश को ही देना चाहता हूं। सोने के लिए मैं अपने दोस्तों से मदद लेता हूं। इससे पहले वह विश्व का सबसे सूक्ष्म तिरंगा, विश्व की सबसे छोटी किताब जिसमें सभी धर्मों के बारे में लिखा हुआ है, भी बना चुके हैं। इससे पहले वह विश्व का सबसे छोटा सोने से बनाया गया घड़ा, ग्लास, टेबल—कुर्सी, हॉकी वर्ल्ड कप, चाय की केटली भी बना चुके हैं।
12 साल की उम्र से बना रहे छोटे आर्टिकल
सक्का ने बताया कि वह महज 12 साल की उम्र से छोटे आर्टिकल बना रहे हैं। इसका शौक उन्हें दादाजी के समय से लगा, जब वह सोने—चांदी के जेवरात बनाया करते थे। बाद में पिता भी बनाते तब वह उनके पास बैठकर देखा करता था। इसी दौरान उनके मन में आया कि वह ऐसी छोटी वस्तुएं बनाएं, जिन्हें लेंस की मदद से ही देखा जा सके। उसके बाद ऐसी लगन लगी कि उनके नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकार्ड और लिम्का बुक में सौ से अधिक विश्व रिकार्ड अंकित हैं।

By Udaipurviews

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