सेक्टर-14 महावीर भवन में धर्मसभा को किया संबोधित, गमेर बाग में 23 से 25 अक्टूबर तक होगा मंत्राक्ष कार्यक्रम
उदयपुर। “जन्म से मानव होना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि अपने कर्मों से मानवता को सिद्ध करना ही सच्ची मानवता है। ज्ञानदान और दीन-दुखियों की सेवा करना मानव जीवन का सबसे श्रेष्ठ कार्य है।” यह प्रेरणादायी संदेश सेक्टर-14 स्थित महावीर भवन में विराजित मुनि 108 श्री आदित्य सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया।
मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके अच्छे कर्मों, सेवा भाव और परोपकार से होती है। जीवन में दूसरों की सहायता करना, जरूरतमंदों के दुखों को समझना और ज्ञान का प्रसार करना ही मानवता के सच्चे आदर्श हैं।
मुनिश्री के प्रवास के प्रथम दिवस श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात मंगलाचरण के साथ धर्मसभा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री का पद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। पद प्रक्षालन का पुण्यलाभ प्रकाश सोनी परिवार ने प्राप्त किया, जबकि शास्त्र भेंट का सौभाग्य कनकमल मुंडलिया परिवार को मिला। मुनि श्री की आरती का लाभ हीरालाल कोठारी परिवार ने प्राप्त किया।
कोटा, जयपुर सहित विभिन्न स्थानों से पधारे श्रद्धालुओं का ट्रस्ट अध्यक्ष भंवरलाल मुंडलिया एवं महामंत्री भूरीलाल जैन ने ट्रस्ट कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ स्वागत एवं अभिनंदन किया। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के प्रवचनों का लाभ लेकर धर्म एवं आध्यात्मिक जीवन से जुड़ी प्रेरणा प्राप्त की। इस दौरान जानकारी दी गई कि अगले दिन शांति विधान का शुभारंभ झंडारोहण के साथ होगा। उन्होंने बताया कि मुनि श्री के सानिध्य में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक गमेर बाग में मंत्राक्ष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रारंभ हो चुकी है। मंच संचालन राजेश देवड़ा ने किया।
कर्मों से सिद्ध होती है सच्ची मानवता, ज्ञानदान और सेवा ही जीवन की सार्थकताःमुनि आदित्य सागर
