उदयपुर। श्री कुंद कुंद कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति श्री वर्धमान जैन श्रवण संस्थान की और से हिरणमगरी सेक्टर 4 में चल रहे संस्कार शिक्षण शिविर एवं विधान में श्रद्धालु रोजाना धर्म लाभ ले रहे हैं। शिविर में जहां बच्चों को धर्म की शिक्षा दी जा रही है वहीं विधान में श्रावक श्राविकाए विधान में आहुतियां देकर अपने मनुष्य जीवन को सफल बना रहे हैं। रविवार को सात दिवसीय शिविर का समापन होगा।
शिविर निदेशक डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने बताया कि आवासीय बाल संस्कार शिक्षण शिविर में नरेंद्र दावत, भावेश कालिका, डॉक्टर महावीर प्रसाद शास्त्री एवं राजमल गोदडोत के सानिध्य में बच्चे ज्ञानार्जन कर रहे हैं। बच्चों को शिक्षकों ने बताया कि 6 सामान्य गुण होते हैं जिसमें पहला अस्तित्व गुण, दूसरा वस्तुत्व गुण, तीसरा द्रव्यत्व गुण, चौथा प्रमेयत्व गुण, पांचवा अगुरु लघुत्व गुण तथा छठ प्रदेशत्व गुण होते हैं। इसके साथ ही शिक्षकों ने द्रव्य गुण पर्याय के बारे में बताते हुए कहा कि द्रव्य गुणों का पिंड होता है। हम गुणों के पिंड हैं। ऐसा ज्ञान होने पर हम दीन गुण हीन है। ऐसी भावना निकल जाती है तथा मेरे में अस्तित्व वादी अनंत गुण है। अतः मेरा कोई नाश नहीं कर सकता है। ऐसा ज्ञान होने पर हमारे में अनंत निर्भयता आती है।
पंडित डॉ. मनीष शास्त्री, पंडित अंकुर शास्त्री, एवं पंडित आशीष शास्त्री के सानिध्य हो रहे तीन विथानो की शनिवार को पूर्णाहुति हुई। रविवार को विथान की सामान्य पूजा होगी। विधान में पंडित जी ने उपस्थित श्रावकों को अठारह हजार शील की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि जब शील भावना व्यक्ति के भीतर आ जाती है तो उसकी विषय वासना भी खत्म हो जाती है। जितने भी अनैतिक कार्य और अपराध हो रहे हैं उनका बड़ा कारण यह भी है कि व्यक्ति में शील भावना का लगातार अभाव हो रहा है।
7 दिवसीय संस्कार शिविर का आज अंतिम दिन
