उदयपुर में मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ विकसित हो सकता है नया पर्यटन क्षेत्र

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विश्व पर्यटन दिवस पर “मेडिकल टूरिज्म इन उदयपुर: पॉसिबिलिटीज एंड चैलेंजेज” विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित
सुविवि और बीसीआई टूरिज्म का संयुक्त आयोजन
 
उदयपुर। विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य  मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट प्रोग्राम और बीसीआई टूरिज्म की ओर से टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट प्रोग्राम में “मेडिकल टूरिज्म इन उदयपुर: पॉसिबिलिटीज एंड चैलेंजेज” विषय पर विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में चिकित्सा, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी एवं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने उदयपुर में मेडिकल एवं वेलनेस टूरिज्म की संभावनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
 
प्रो. हनुमान प्रसाद ने मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र तथा पर्यटन संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान इस क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल टूरिज्म के विकास के साथ विश्वसनीयता, पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और प्रभावी मार्केटिंग को प्राथमिकता देनी होगी। उदयपुर की पर्यटन पहचान को मेडिकल एवं वेलनेस सुविधाओं के साथ जोड़कर शहर को एक व्यापक स्वास्थ्य-पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
 
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर प्रो. मीरा माथुर ने कहा कि उदयपुर की पहचान लंबे समय से पर्यटन नगरी के रूप में रही है, लेकिन बदलते समय के साथ पर्यटन के नए आयामों को विकसित करना भी आवश्यक है। मेडिकल टूरिज्म ऐसा ही एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन को एक साथ जोड़ता है।
 
उन्होंने कहा कि उदयपुर में बेहतर चिकित्सा संस्थानों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक तकनीक, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी सुविधाओं के साथ-साथ प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण की उपलब्धता इसे मेडिकल एवं वेलनेस टूरिज्म के लिए संभावनाशील बनाती है। हालांकि, केवल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। मरीज और उनके परिजनों को उपचार से लेकर आवागमन, आवास, पोस्ट-ट्रीटमेंट केयर और वेलनेस तक एक समग्र एवं सहज अनुभव उपलब्ध कराना होगा।
 
पैनल चर्चा में डॉ. आनंद गुप्ता ने कहा कि उदयपुर के पास मेडिकल टूरिज्म का बड़ा संभावित बाजार विकसित करने की क्षमता है, क्योंकि शहर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ प्राकृतिक सौंदर्य, झीलें, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा वेलनेस और आध्यात्मिक पर्यटन की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं। आवश्यकता इस बात की है कि चिकित्सा सेवाओं और पर्यटन क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। साथ ही अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक मशीनरी, गुणवत्तापूर्ण उपचार और राजस्व मॉडल पर भी विचार हुआ। उदयपुर में आईवीएफ, कैंसर उपचार, फर्टिलिटी एवं अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की मांग बढ़ रही है। चिकित्सा शिक्षा संस्थानों और निजी अस्पतालों की बढ़ती क्षमता को मेडिकल टूरिज्म के विकास से जोड़ा जा सकता है।
 
पैनल में बीसीआई टूरिज्म की प्रेसिडेंट डॉ. श्रद्धा गट्टानी ने टूरिज्म और कनेक्टिविटी से जुड़े पहलुओं पर विचार रखते हुए परिवहन सुविधाओं तथा वेलनेस टूरिज्म के बीच संबंध को रेखांकित किया। वहीं विजयलक्ष्मी ने पारदर्शिता और गुडविल के महत्व पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म में मरीज और उसके परिजनों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए पारदर्शी प्रक्रियाएं और विश्वसनीय सेवाएं आवश्यक हैं।
 
डॉ. राजीव पांड्या ने मेडिकल टूरिज्म के भविष्य के विजन पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके विकास में चिकित्सा सेवाओं के साथ सांस्कृतिक मुद्दों और सामाजिक पहलुओं को भी समझना आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टूरिज्म के लिए विभिन्न देशों के मरीजों की सांस्कृतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सेवाओं को विकसित किया जाना चाहिए।
 
विजयलक्ष्मी ग्लुंडिया ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म को केवल इलाज तक सीमित न रखकर वेलनेस टूरिज्म, हीलिंग टूरिज्म और स्पिरिचुअल टूरिज्म के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। उदयपुर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान को उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़कर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक समग्र अनुभव तैयार किया जा सकता है। इसके लिए प्रभावी ब्रांडिंग, पोजिशनिंग और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी विकसित करना जरूरी बताया गया।
 
डॉ. शिल्पा कंठालिया ने मेडिकल टूरिज्म में विश्वसनीयता को प्रमुख आधार बताते हुए विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर, बहुभाषी ट्रांसलेटर तथा पोस्ट-ट्रीटमेंट सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए भाषा संबंधी सहायता और उपचार के बाद की सेवाएं उनकी सुविधा और विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
 
यशवर्धन सिंह राणावत ने चर्चा में पोस्ट-ट्रीटमेंट केयर को भी मेडिकल टूरिज्म का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। विशेषज्ञों के अनुसार मरीज के उपचार के बाद उसके तनाव प्रबंधन, वेलनेस, आराम और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था मेडिकल टूरिज्म के अनुभव को मजबूत कर सकती है। इसके लिए अस्पतालों के साथ होटल, ट्रैवल एजेंसियों और अन्य संबंधित हितधारकों के बीच समन्वय आवश्यक है।
 
डॉ. कुंजन आचार्य ने डॉक्टरों की भूमिका को केवल उपचार तक सीमित न रखते हुए उन्हें “वेलनेस क्रिएटर” के रूप में देखने की बात कही। उन्होंने वेलनेस टूरिज्म की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
 
गौरव शर्मा ने भारत में हेल्थ टूरिज्म की संभावनाओं, लागत प्रभावशीलता तथा स्थानीय एवं जनजातीय समुदायों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उदयपुर में रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के बढ़ते उपयोग को भी मेडिकल टूरिज्म के लिए सकारात्मक संभावना बताया। साथ ही घरेलू मेडिकल टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टूरिज्म से जोड़ने तथा मरीजों के लिए सरल एवं सुगम नीतियां बनाने पर जोर दिया गया।
 
डॉ. अरविंद सिंह पेमावत ने उदयपुर की मजबूत हॉस्पिटैलिटी एवं वेडिंग टूरिज्म पहचान को मेडिकल टूरिज्म के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि उदयपुर की गुड एवं लग्जरी हॉस्पिटैलिटी सुविधाओं को मेडिकल टूरिज्म से जोड़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
 
चर्चा में डॉ. रानू नागोरी ने मेडिकल टूरिज्म के सामने मौजूद चुनौतियों में भुगतान एवं बीमा संबंधी प्रक्रियाएं, सरकारी स्तर पर भुगतान में होने वाली देरी, परिवहन एवं कनेक्टिविटी, प्रतीक्षा समय, अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए प्रक्रियागत जटिलताएं तथा पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास प्रमुख रूप से सामने रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार, अस्पताल, पर्यटन उद्योग, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।
 
डॉ. भूमिका राठौड़ ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और हॉस्पिटैलिटी संस्थानों के विद्यार्थियों को मेडिकल टूरिज्म की उभरती संभावनाओं से जोड़ा जाए। इससे प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा और चिकित्सा, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी के बीच एक मजबूत कार्यबल विकसित किया जा सकेगा।
 
पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि उदयपुर में मेडिकल टूरिज्म केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं, बल्कि रोजगार, हॉस्पिटैलिटी, शिक्षा, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है। इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं, पारदर्शिता, प्रभावी ब्रांडिंग, आसान नीतियां और मजबूत स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन पर समान रूप से काम करने की आवश्यकता है।
By Udaipurviews

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