कानूनी जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही मिटेगा बंधुआ और बाल मजदूरी का कलंक- एडीजे शर्मा

बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, बालश्रम एवं मानव दुर्व्यापार पर विभिन्न हितधारकों का पुलिस लाइन में प्रशिक्षण संपन्न
उदयपुर, 27 फरवरी। राजस्थान प्रदेश में सरकार एवं पुलिस विभाग की सक्रियता के चलते विगत वर्षों में कई मामलों में न केवल बालश्रम, बंधुआ श्रमिक उन्मूलन एवं मानव दुर्व्यापार अंतर्गत ठोस कार्यवाही हुई है बल्कि बंधुआ मुक्ति प्रमाण पत्र जारी कर पूनर्वास पर भी कार्य हुए हैं। परंतु समाज से इस कलंक को पूर्ण रूप से मिटाने हेतु अभी भी सामूहिक एवं सतत् प्रयास की आवश्यकता है। इस दिशा में विभिन्न हित धारको की सामूहिक एवं सकारात्मक भूमिका पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास एवं दोषियों की पहचान में मददगार हो सकती है। इस दिशा में आज की पहल निश्चित ही कारगर सिद्ध होगी। उक्त विचार शहर के पुलिस लाइन सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस विभाग एवं गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित पुलिस विभाग एवं विभिन्न विभागीय अधिकारियों के एक दिवसीय संवेदीकरण प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में एडीजे कुलदीप शर्मा ने व्यक्त किए।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र पण्ड्या द्वारा राजस्थान के संदर्भ में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डाटा पर प्रस्तुति देते हुए राजस्थान के संदर्भ में आ रही चुनौतियो, सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास एवं विभिन्न विभागों की भूमिका पर जानकारी दी गई। डॉ. पंड्या ने बंधुआ श्रमिक उन्मूलन अधिनियम, 1976 एवं मानव दूव्यापार संबंधित कानूनी प्रावधान एवं विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी एवं बताया कि अन्य कानूनों की अपेक्षा बंधुआ श्रमिक अधिनियम अंतर्गत पुनर्वास में विशेष आर्थिक सहायता पीड़ितों को मिलने हेतु प्रावधान है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माधुरी वर्मा ने करते हुए राष्ट्रीय बाल आयोग द्वारा संचालित अभियान की जानकारी देते हुए बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि के रूप में राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार के सदस्य धु्रव कुमार कविया ने बताया की समाज से इस कलंक को मिटाने के लिए सामाजिक मुद्दों पर आमजन को भी जागरूक करना होगा। पुलिस अपने आस-पास कोई भी मानव ट्रेफिकिंग या बंधुआ मजदूरी की जानकारी मिलने पर सख्त कार्यवाही को अंजाम देगी।
कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति, उदयपुर की कार्यकारी अध्यक्ष यशोदा पणिया, सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग के.के. चंद्रवंशी एवं श्रम विभाग से इन्द्रजीत मकवाना ने भी विचार प्रकट किए। कार्यशाला में बंधुआ श्रमिक पर बनी लघु फिल्म राईस फैक्ट्री को दिखाया गया जिनके माध्यम से बंधुआ श्रमिक पहचान के विभिन्न सूचक एवं रिपोर्टिंग की गोपनीयता की महत्वता को स्पष्ट किया गया। कार्यशाला में केस स्टडी, संवाद सत्र और कानूनी प्रक्रियाओं पर खुली चर्चा भी की गई। प्रतिभागियों को जानकारी दी गई की समाज में किस प्रकार इन मुद्दों पर जागरूकता फैलाई जा सकती हैं।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, पुलिस विभाग, चाइल्ड लाइन एवं गायत्री सेवा संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक नितिन पालीवाल एवं धन्यवाद पायल कनेरिया ने दिया।

By Udaipurviews

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