उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पंचायती नोहरा उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा में जैन संत प्रवर्तक सुकन मुनि ने कहा कि एक बार एक मिल जहां, हर घंटे कम से कम एक लाख रू का उत्पादन होता है, वह मिल अचानक बंद हो गया। मिल में जितने भी इंजिनियर और कर्मचारी थे, सभी ने मशीन के एक-एक पूर्जे को देखा, चेक किया लेकिन मशीन बंद होने का कोई कारण नजर नहीं आया। मिल मालिक ने भी बहुत प्रयास किये पर मिल चालु नहीं हुआ। पड़ोस के मिल से एक इंजिनियर को बुलाया गया जो मशीन ठीक करना जानता था। उसने चारो ओर घूमकर देखा और कहा कि मिल शुरू हो जाएगी, लेकिन मैं मिल ठीक करने के एक लाख रूपये लुंगा। सेठ ने सोचा एक घंटे में एक लाख का उत्पादन देने वाला मिल बंद है, उसे ठीक तो करना ही पड़ेगा। और मालिक ने मिल शुरू करने को कहा। इंजिनियर ने छोटी सी हथौडी मंगायी और ठीक उसी जगह पर एक चोट लगायी, जहाँ से करंट डिस कनेक्ट हो गया था और धड़ाधड़ मिल चालु हो गया। सेठ ने कहा- चोट तो एक ही लगायी और एक लाख रूपये मांगते हो? इंजिनियर ने कहा-गलत जगह पर हजारों चोटंे लगायी पर मिल चालु नहीं हुई। सही जगह पर चोट लगाने पर ही मिल चालु होगी, यह मुझे मालुम था उसी के पैसे मैं मांग रहा हूँ। बात तो सही है।
उपप्रवर्तक अमृत मुनि ने कहा कि जीवन भी एक मशीन है और डायनोमा हमारा मस्तिष्क है। अगर यह नादुरुस्त हो गया तो जीवन बरबाद हो जाता है। इसको ठीक रखने के लिए ज्ञानी पुरुष ने अनेक उपाय बताये। योग, दर्शन, तप, त्याग, तीर्थयात्रा, आरती, पूजा आदि आदि पर समस्या ज्यों कि त्यों है। अपनी अपनी मान्यता नुसार सभी स्वाध्याय, तप, जप, आदि धार्मिक प्रोग्राम करते है। पर जब जीवन में अहिंसा, दया, करुणा, सेवा, नैतिकता, सदाचार, कोमलता, माधुर्य ये सारे एक एक करके स्थित होते है, तभी समझना चोट सही जगह लगी है। इस अवसर पर महेश मुनि, अखिलेश मुनि तथा डॉ वरुण मुनि का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर जैन समाज के वरिष्ठ श्रावक श्रविका उपस्थित रहे और धर्म सभा में श्राविकाओं ने तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
