उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने मंगलवार को कहा कि मनुष्य जीवन पूर्व जन्मों के शुभ कर्मों का दुर्लभ फल है। यह अनमोल जीवन हमें केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और सद्कर्मों के लिए प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मनुष्य वह कार्य कर सकता है जो देवता भी नहीं कर सकते, इसलिए इस जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि जीवन छोटा हो या बड़ा, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसका उपयोग, सदुपयोग और दुरुपयोग कैसे किया जाता है, यही व्यक्ति के जीवन का मूल्य तय करता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास 10 रुपये हों तो एक व्यक्ति उनसे चाय पीता है, दूसरा उन्हें भगवान के मंदिर में अर्पित करता है और तीसरा शराब पीने में खर्च करता है। तीनों के पास समान धन था, लेकिन उनके उपयोग ने उनके कर्म और व्यक्तित्व को अलग-अलग बना दिया।
उन्होंने कहा कि आज का समाज डिग्रियों के पीछे दौड़ रहा है, जबकि जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता कठिन परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करना सीखना है। सफलता और असफलता दोनों को संतुलित भाव से स्वीकार करने की शिक्षा आज की व्यवस्था में नहीं मिलती। सहनशीलता और व्यवहारिक ज्ञान का अभाव ही अनेक युवाओं को मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसे कदम उठाने की ओर धकेल देता है।
साध्वी श्रीजी ने मैना सुंदरी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पास आधुनिक शिक्षा की डिग्री नहीं थी, लेकिन उन्होंने परमात्मा की वाणी का अध्ययन कर जीवन को आदर्श बनाया। उन्होंने कहा कि केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बच्चों को ऐसे संस्कार और व्यवहारिक ज्ञान देना आवश्यक है जो उन्हें जीवन की हर चुनौती का सामना करने योग्य बनाए।
प्रवचन के प्रारंभ में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
जीवन की सफलता डिग्री से नहीं, संस्कार और सदुपयोग से होती है तयःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
