डूंगरपुर, 07मई(पंजाब केसरी) भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद संभावित युद्ध जैसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को डूंगरपुर जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी मॉकड्रिल आयोजित की गई। इस मॉक अभ्यास का उद्देश्य आपदा की घड़ी में विभिन्न विभागों की तत्परता, तालमेल और कार्यप्रणाली की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। मॉकड्रिल की शुरुआत शहर के सबसे व्यस्त इलाके—नया रोडवेज बस स्टैंड—से हुई, जहां एक विस्फोट की सूचना देकर सिविल डिफेंस की टीम ने अचानक आग और घायलों की नाटकीय स्थिति तैयार की। कंट्रोल रूम को सूचना मिलने के बाद तत्काल फायर ब्रिगेड, पुलिस और एम्बुलेंस टीमें मौके पर पहुंचीं। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशन में घायलों को प्राथमिक उपचार देते हुए एम्बुलेंस के ज़रिए जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में पहले से ही अलर्ट मोड में चिकित्सा टीम तैयार थी। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक मोनिका सेन ने मौके पर पहुंचकर इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने वार्ड बॉय, पैरामेडिकल स्टाफ, डॉक्टरों की उपस्थिति और इमरजेंसी में उपलब्ध जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों की जांच की। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेंद्र डामोर ने आपातकालीन ड्यूटी चार्ट और दवाइयों का स्टॉक प्रस्तुत किया। एक-एक करके घायल पात्रों को 108 एम्बुलेंस से अस्पताल लाकर इमरजेंसी यूनिट में स्थानांतरित किया गया। पूरे अभ्यास के दौरान सायरन बजाकर आमजन को अलर्ट किया गया और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
जिला कलेक्टर ने कहा कि मॉकड्रिल का उद्देश्य सिर्फ अभ्यास नहीं, बल्कि जिले की तैयारियों की असली परीक्षा थी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय नागरिकों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। साथ ही उन्होंने ब्लैकआउट, अलर्ट सायरन और अन्य आपात संकेतों की जानकारी भी लोगों को दी।
