भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने राजस्थान विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से प्रदेश के पुराने राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि डीआईएलआरएमपी योजना के तहत वर्ष 2015-16 से ही जिला कलेक्टरों के माध्यम से स्कैन योग्य पुराने रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई थी, इसके बावजूद अब तक केवल 28 तहसीलों के रिकॉर्ड की ही स्कैनिंग क्यों की गई है।
विधायक कोठारी ने विशेष रूप से भीलवाड़ा जिले का मामला उठाते हुए कहा कि यह क्षेत्र पूर्ववर्ती मेवाड़ रियासत के अंतर्गत आता था और यहां से संबंधित कई पुराने रिकॉर्ड अभी भी पुरातत्व संग्रहालय उदयपुर में सुरक्षित हैं। इन रिकॉर्ड की अब तक स्कैनिंग नहीं होने के कारण मेवाड़ रियासत काल में जारी पट्टों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे पट्टाधारकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों की स्कैनिंग कर उन्हें सुरक्षित रखने और आमजन की सुविधा के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार कब तक ठोस कदम उठाएगी।
इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि डीआईएलआरएमपी योजना के अंतर्गत तहसील कार्यालयों में रखे राजस्व रिकॉर्ड का स्कैनिंग एवं डिजिटाइजेशन कार्य लगातार किया जा रहा है। अभी तक 28 तहसीलों के रिकॉर्ड की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है तथा शेष स्थानों पर यह कार्य प्रक्रियाधीन है।
सरकार ने आश्वस्त किया कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड को शीघ्र ही स्कैन कर डिजिटाइजेशन किया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति पुराने राजस्व रिकॉर्ड और रियासतकालीन दस्तावेजों को ऑनलाइन देख सके और इससे आमजन को बड़ी सुविधा मिलेगी।
विधायक कोठारी ने विशेष रूप से भीलवाड़ा जिले का मामला उठाते हुए कहा कि यह क्षेत्र पूर्ववर्ती मेवाड़ रियासत के अंतर्गत आता था और यहां से संबंधित कई पुराने रिकॉर्ड अभी भी पुरातत्व संग्रहालय उदयपुर में सुरक्षित हैं। इन रिकॉर्ड की अब तक स्कैनिंग नहीं होने के कारण मेवाड़ रियासत काल में जारी पट्टों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे पट्टाधारकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों की स्कैनिंग कर उन्हें सुरक्षित रखने और आमजन की सुविधा के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार कब तक ठोस कदम उठाएगी।
इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि डीआईएलआरएमपी योजना के अंतर्गत तहसील कार्यालयों में रखे राजस्व रिकॉर्ड का स्कैनिंग एवं डिजिटाइजेशन कार्य लगातार किया जा रहा है। अभी तक 28 तहसीलों के रिकॉर्ड की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है तथा शेष स्थानों पर यह कार्य प्रक्रियाधीन है।
सरकार ने आश्वस्त किया कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड को शीघ्र ही स्कैन कर डिजिटाइजेशन किया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति पुराने राजस्व रिकॉर्ड और रियासतकालीन दस्तावेजों को ऑनलाइन देख सके और इससे आमजन को बड़ी सुविधा मिलेगी।
