मां के जयकारों से गूंज उठा चावंड, माता के दर्शन पाने उमड़ा भक्तों का सैलाब, विधि-विधान से हुआ जवारों का विसर्जन
चावंड। मेवाड़ की पावन धरा चावंड में शनिवार को चावंड की महारानी मां नारसिंह भवानी की भव्य सरोवर यात्रा श्रद्धा, भक्ति और अपार उत्साह के साथ निकाली गई। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता रानी के दर्शन पाने के लिए उमड़ पड़े। यात्रा का सबसे आकर्षक और अलौकिक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मां नारसिंह भवानी मुंह में त्रिशूल धारण कर अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए सरोवर यात्रा पर निकलीं। माता के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण मां के जयकारों से गूंज उठा।
मां नारसिंह भवानी के दरबार से प्रारंभ हुई इस भव्य यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में भक्त माता रानी के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए। मां के दर्शन पाने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र में सुख-शांति और खुशहाली की कामना की। मां के दिव्य स्वरूप और भक्तों की अटूट आस्था ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
सरोवर पहुंचने पर धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार जवारों का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नारसिंह भवानी के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की। वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा में क्षेत्र के लोग बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
मंदिर के पुजारी कालूलाल जी तेली ने बताया कि मां नारसिंह भवानी के दरबार में नवरात्रि का पर्व वर्षों पुरानी परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार मनाया जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना एवं जवारा स्थापना की जाती है। इसके बाद प्रतिदिन मां की पूजा-अर्चना और सेवा की जाती है। नवरात्रि की छठी रात्रि को भव्य जागरण एवं गवरी का आयोजन होता है, जबकि अगले दिन मां की सरोवर यात्रा निकालकर जवारों का विसर्जन किया जाता है। इस परंपरा में क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इससे पूर्व छठ की पावन रात्रि को मंदिर परिसर में प्रसिद्ध लालपुरिया की गवरी का आयोजन किया गया। गवरी कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी रात मंदिर परिसर में माता रानी की आराधना, भक्ति और जयकारों का माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने जागरण में भाग लेकर मां की भक्ति में अपनी आस्था व्यक्त की।
मां नारसिंह भवानी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, माता के दिव्य दर्शन और वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराओं ने सरोवर यात्रा को यादगार बना दिया। मुंह में त्रिशूल धारण कर भक्तों को दर्शन देने निकलीं मां के स्वरूप ने श्रद्धालुओं के मन में विशेष श्रद्धा का संचार किया। सरोवर यात्रा एवं जवारा विसर्जन के साथ नवरात्रि के इस पावन आयोजन का धार्मिक उल्लासपूर्ण समापन हुआ।
