उदयपुर। देवेंद्रधाम में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन संत डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि स्वार्थी व्यक्ति संसार में सर्वत्र अनादर का पात्र बनता है, क्योंकि वह केवल अपने हित तक ही सीमित रहता है। इसके विपरीत सारथी की भूमिका निभाने वाला व्यक्ति अपने साथ जुड़े सभी लोगों का पूरा ध्यान रखता है। वह परोपकारी प्रवृत्ति का होता है, जो पहले दूसरों को सहारा और अन्न देकर बाद में अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। वर्तमान समय में सारथी कम और स्वार्थी लोगों की संख्या बढ़ने से परिवार, समाज और संघ में बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि जो दूसरों के दुःख को दूर करता है, उसके अपने कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
सभा में प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेम बांटना सिखाता है, जबकि स्वार्थ केवल लूटना जानता है। मनुष्य को अहंकार छोड़कर बड़प्पन दिखाना चाहिए। प्रेम ही वह रामबाण औषधि है जो सबके कष्टों को दूर कर सकती है। हाथ उठाकर किसी का दिल नहीं जीता जा सकता, लेकिन हाथ जोड़कर हजारों दिलों को जीता जा सकता है; प्रेम से वर्षों पुरानी दुश्मनी भी समाप्त हो जाती है। यदि सभी वर्ग और समुदाय प्रेम धर्म को ही अपना धर्म मान लें, तो अधिकांश समस्याओं का समाधान स्वतः निकल आएगा। श्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान एक वर्ष से चल रहे नवकार महामंत्र जाप का विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर जाप के प्रमुख मेहता, लोढ़ा सहित दिल्ली, सूरत व इचलकरंजी से आयें समाजसेवियों का समाज की ओर से स्वागत व आभार व्यक्त किया गया।
स्वार्थ छोड़कर सारथी बनें, प्रेम ही हर समस्या का समाधान: देवेंद्रधाम में बोले डॉ. सुरेंद्र मुनि
