आयड़ तीर्थ में प्रथम तपागच्छीय महासम्मेलन आज, कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत होंगे शामिल

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 3 अक्टूबर। जैन धर्म की समृद्ध परंपरा, आध्यात्मिक विरासत और तपागच्छ की गौरवशाली परंपरा को समर्पित श्री देवसूर तपागच्छीय महासम्मेलन रविवार, 4 अक्टूबर को उदयपुर के सुप्रसिद्ध आयड़ जैन तीर्थ में आयोजित होगा। मालव मार्तंड पूज्य आचार्य डॉ. श्री मुक्तिसागर सूरीश्वरजी महाराज के सानिध्य में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत शामिल होंगे। उनके साथ गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से राजनेताओं एवं जैन समाज के प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है।
श्री जैन श्वेतांबर महासभा महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि जैन धर्म की विभिन्न परंपराओं में देवसूर तपागच्छ का विशेष स्थान है। तपागच्छीय जैन साधु-साध्वी समुदाय की धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक साधना और जिनशासन की प्रभावना को केंद्र में रखकर इस स्नेह सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मालवा, मेवाड़, वागड़ सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों जैन धर्मावलंबियों के भाग लेने की संभावना है।
गुरुवंदन और मंगलाचरण के साथ शुरू होगा सम्मेलन
इंदौर से पधारे तपागच्छ श्रीसंघ के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश बागानी, कार्याध्यक्ष पुष्पपाल सुरजा, संयोजक कैलाश नाहर एवं महासचिव यशवंत जैन ने बताया कि सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के लिए आयड़ तीर्थ परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सुबह 8 बजे चाय-नाश्ते के बाद पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए तीर्थ परिसर में तपागच्छ कार्यालय बनाया गया है।
सुबह 10 बजे आत्मवल्लभ सभागार में गुरुवंदन, मंगलाचरण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ महासम्मेलन का शुभारंभ होगा। इसके बाद अतिथियों का स्वागत किया जाएगा तथा विभिन्न संघों के प्रतिनिधि अपने विचार व्यक्त करेंगे। सम्मेलन में तपागच्छ की ऐतिहासिक परंपरा, धार्मिक विरासत और जिनशासन की प्रभावना से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
800 वर्ष पुराने इतिहास पर लिखे ग्रंथ की भी होगी चर्चा
कार्यक्रम संयोजक सतीश कच्छारा ने बताया कि सम्मेलन में अहमदाबाद से पधार रहे भूषणभाई शाह विशेष रूप से शामिल होंगे। उन्होंने लगभग 800 वर्ष पूर्व हुए तपागच्छाधिराज आचार्य श्री जगच्चंद्रसूरिजी महाराज के जीवन पर गुजराती भाषा में विस्तृत ग्रंथ की रचना की है। सम्मेलन में वे तपागच्छ की ऐतिहासिक यात्रा, इसकी गौरवशाली परंपरा तथा भगवान महावीर के सिद्धांतों से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों पर जानकारी साझा करेंगे। तपागच्छ की परंपरा, इसके इतिहास और उदयपुर के विभिन्न जिन मंदिरों में विराजित गुरु भगवंतों की विरासत पर भी प्रकाश डाला जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य समाज के लोगों को अपनी धार्मिक परंपराओं, आचार्यों के योगदान और जिनशासन के मूल सिद्धांतों से जोड़ना है।
जैन समाज से शामिल होने की अपील
आयड़ तीर्थ के आयोजकों ने उदयपुर के सभी श्रावक-श्राविकाओं और जैन समाज के लोगों से सम्मेलन में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में आपसी स्नेह, एकता और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराने का अवसर प्रदान करते हैं।

By Udaipurviews

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