उदयपुर, 27 मार्च। संगीत नाटक अकादमी की ओर से उदयपुर के चार कलाकारों को कला साधना सम्मान प्रदान किया गया। जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम में कला व साहित्य मंत्री बी.ड़ी.कल्ला ने उदयपुर की विजयलक्ष्मी आमेटा को लोकनृत्य में, लीलाराम मेघवाल को कठपुतली, शंकर सिंह सिसोदिया को कला पुरोधा सम्मान
राजीविका की बदौलत डेयरी व्यवसाय से महिलाओं को मिला रोजगार
बकरी के दूध ने बदली बाघपुरा की तस्वीर
उदयपुर 27 मार्च। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) से जुड़ कर कई महिलाएं अपना जीवन संवार रही हैं। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परियोजना एक अंब्रेला योजना है जिसके अंतर्गत बहुत सारी योजनाएं राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं जो कि राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में रहने वाली जनता को रोजगार की दिशा में लाभ प्रदान करती है।
पशुपालन के लिए जिले का बाघपुरा क्षेत्र काफी प्रसिद्ध रहा है। यहाँ भैंस और गाय का दूध तो परंपरागत रूप से विक्रय किया जाता रहा है लेकिन बकरी के दूध के व्यवसाय के बारे में किसी से नहीं सोचा था जबकि यहाँ परिवारों में बकरियों की संख्या भी बहुत अधिक मात्रा में है। बकरी के दूध से राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के समूहों की महिलाओं के परिवारों की आजीविका को बढ़ाने के लिये बाघपुरा में सरस डेयरी, आरसेटी व पशुपालन विभाग के सक्रिय सहयोग के साथ राजीविका परिवार से जुडी बहनों के लिये बाघपुरा सीएलएफ पर नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र की शुरुआत की गई।
नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र को कई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपनी बकरियों का दूध विक्रय करने का कार्य शुरू किया। इससे नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र को दूध प्राप्त होने लगा, साथ ही उन महिलाओं को भी आय का जरिया मिल गया जिनके घर बकरियाँ पाली जा रही थी और जिनका दूध सिर्फ घरों में ही काम आ रहा था। आज बाघपुरा ग्राम स्थित नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र से जुड़ी महिलाओं को नियमित रूप से आय होने लगी है और कई महिलाओं को आर्थिक सम्बल मिला है।
बकरी दूध डेयरी से मिला महिला समूहों को संबलरू
इंद्रा स्वयं सहायता समूह रिछावर की समुडी देवी बताती हैं कि पहले वे बकरी के दूध को नहीं बेचते थे, इसका उपयोग घर में ही लेते थे, क्योंकि ऐसी बकरी दूध की कोई डेयरी यहाँ नहीं थी लेकिन अब इनके दूध को बेचकर महीने में 700 से 750 रूपये कमा लेते है और एक टाइम का दूध घर में भी काम आता है, इस पैसे से घर के खर्च में मदद मिल रही है। ऐसे ही मीरादातार स्वयं सहायता समूह गोरण की केशर देवी ने बताया कि उनके पास 8 बकरियाँ है, ये सभी देशी बकरी है, पहले गाँव में किसी को जरुरत होती थी तब कम दाम पर दूध विक्रय करना पड़ता था लेकिन अब बकरी दूध डेयरी खुलने से वह अपनी बकरियों का दूध वहाँ विक्रय कर पा रही है तथा बकरीपालन का 16 दिवसीय प्रशिक्षण भी लिया है। तारा स्वयं सहायता समूह नाडी फला की लीला देवी ने बताया कि उन्हें भी नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र से जुड़ कर काफी लाभ मिला है।
बकरी के दूध के हैं अनेक फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार बकरी का दूध मानव शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। इस दूध से ब्लड प्रेशर कम होता है, इम्यून सिस्टम बढ़ता है, हड्डियां मजबूत होती है, आंतों की सूजन काम होती है, पाचन क्रिया बेहतर होती है, डेंगू में भी लाभकारी है तथा प्लेट रेट बढ़ाने में मदद मिलती है।
