सफलता के बाद विनम्रता रखना कठिनःजैनाचार्य ज्ञानचंद्र महाराज

उदयपुर, 1 अगस्त। यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में विराजमान आचार्य प्रवर ज्ञानचंद्र महाराज ने धर्मसभा में बोलते हुए कहा कि विफलता के बाद हौसला रखना कठिन है, लेकिन सफलता के बाद विनम्रता रखना, उससे भी कठिन है।
आचार्य ने कहा कि आदमी परीक्षा में फेल हो जाए, प्रतियोगिता में हार जाए, व्यापार में नुकसान हो जाए तो हिम्मत टूट जाती है उस पर भी संबल देने वाले हो ,हौसला अफजाई हो सकती है। लेकिन सफलता में नम्र बनना बहुत मुश्किल है। कुछ एक तो ज्यों ज्यों जीवन ऊपर उठते हैं, त्यों त्यों नम्र होते चले जाते हैं। वृक्ष पर जितने फल आते हैं, वो उतना ही झुकता चला जाता है। चाहे छोटा हो या बड़ा, आपके अंदर शालीनता होनी चाहिए। छोटे-बड़े सबके साथ विनम्र व्यवहार हो। जिसमें हेकड़ी ज्यादा हो, वो हंसी का पात्र बनता है। अहंकारी एक न एक दिन चोट खाता है। चाहे वो साधारण व्यक्ति हो या साधु ही क्यों ना हो। अहंकार में आकर सामनें वाले का अपमान किया है तो वो बीज बोया हुआ कभी ना कभी वृक्ष बढ़ेगा और फल भोगना पड़ेगा।
अपमान से कभी सम्मान नहीं मिल सकता। सम्मान पाना है तो सम्मान देना होगा।
राष्ट्रपति को एक साधारण, अशिक्षित, निर्धन, व्यक्ति गले में माला पहनाना चाहता है तो बताओ कौन कैसे खड़ा होगा। राष्ट्रपति पहले झुकेगा तो गले मैं माला पहनाई जाएगी।
अपने अस्तित्व को बचाने के लिए, उसे बढ़ाने के लिए विनय भाव से कम लो, समयज्ञ बनो।
सुदर्शन मुनि के 26 का तपस्या, दिलीप बाबेल के 10 की तपस्या, शांतिलाल खींवसरा के आठ की तपस्या के साथ साथ  तीन, पांच, आठ के  कई तप चल रहे हैं।  अनशन तप स्वयं की शांति के साथ देश की शांति का परिचायक है। पांच पांच सामायिक करने वालों को प्रतिदिन की भांति प्रभावना का लाभ किशोर,आशा मेहता मुंबई की ओर से हो रहा है।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!