उदयपुर, 11 अगस्त। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में चातुर्मास कर रहे पंन्यास प्रवर निरागरत्नविजय जी म.सा. ने रविवार को शिक्षा भवन चौराहा स्थित चौगान मंदिर में रविवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि अगर आपको संसार में परिभ्रमण नहीं करना है तो तीर्थ में परिभ्रमण चालू कर दो। अनंतकाल से कर्म रूपी मिट्टी लगी हुई है उसे साफ करने का एकमात्र उपाय तीर्थ के रास्ते की धूल। उस मार्ग पर चलने से वह आपके करोड़ों भवों के कर्मों को दूर करती है। अगर आप अपनी सम्पत्ति को स्थिर करना चाहते हो तो उसका व्यय तीर्थ में करो। तीर्थ हमारे द्रव्य और भाव प्राण दोनों की रक्षा करता है। आज की पीढ़ी जितने भी तीर्थ है वहां पर जाकर सेल्फी खिंचते हैं फोटो शूट करते हैं यह सब वहां की आशातना है वहां पर किया हुआ पाप है। आज हम इस बात का संकल्प करें कि हम तीर्थ स्थान पर अभक्ष्य वस्तु, रात्रि भोजन आदि पाप नहीं करेंगे।
अगर संसार में परिभ्रमण नहीं करना है तो तीर्थ में परिभ्रमण चालू कर दो : निरागरत्न
