विश्व आदिवासी दिवस पर होंगे व्यापक कार्यक्रम, कांग्रेस नेताओं ने रखे विचार

उदयपुर में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस नेताओं की पत्रकार वार्ता
उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर 8 अगस्त 2026 पूर्व सांसद एवं उदयपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा तथा उदयपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व जिला कलेक्टर तारा चंद मीणा ने शनिवार दोपहर होटल आरटीडीसी कजरी में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए विश्व आदिवासी दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) एवं मानगढ़ धाम से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

विश्व आदिवासी दिवस पर होंगे व्यापक कार्यक्रम

रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि विश्वभर में जनजातीय समुदायों के हितों की रक्षा, उनके जीवन स्तर में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने तथा जनजातीय समाज के ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करने और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी समुदायों के अधिकारों एवं हितों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी थी। इस अवसर पर परंपरागत लोक नृत्य, लोकगीत, लोककला, जनजातीय चित्रकला, सेमिनार तथा जनजातीय कल्याण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि उदयपुर जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से 9 अगस्त को प्रातः 11:00 बजे रेजीडेंसी स्कूल मधुबन, उदयपुर के सभागार में विश्व आदिवासी दिवस एवं अगस्त क्रांति आंदोलन से संबंधित कार्यक्रम व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में आदिवासी लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी तथा राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।

भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी

अगस्त क्रांति आंदोलन का उल्लेख करते हुए तारा चंद मीणा ने कहा कि 8 अगस्त 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत से भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया था। इस आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 से हुई, जिसे अगस्त क्रांति आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने बंबई में अपने ऐतिहासिक भाषण में देशवासियों को “करो या मरो” का मंत्र दिया। आंदोलन की घोषणा के तत्काल बाद महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद देशभर में आम जनता ने बड़े स्तर पर आंदोलन में भाग लिया। अरुणा आसफ अली, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे युवा नेताओं ने भूमिगत रहकर आंदोलन को गति दी। आंदोलन ने व्यापक जनआक्रोश का रूप लिया और अंग्रेजी शासन की नींव को हिला दिया। अंततः पांच वर्ष बाद भारत स्वतंत्र हुआ।

मानगढ़ धाम आदिवासी स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक

मानगढ़ धाम के संबंध में रघुवीर सिंह मीणा एवं तारा चंद मीणा ने कहा कि मानगढ़ धाम देश के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मेवाड़-वागड़ के आदिवासी समुदाय एवं कांग्रेस पार्टी द्वारा समय-समय पर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने की मांग की जाती रही है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल एवं मन्नालाल रावत द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किया जाएगा। मंत्री की ओर से इसके लिए पुरातात्विक विशेषताओं, प्रामाणिकता और अखंडता से संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया।

कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, बलिदान और संघर्ष का प्रतीक है। 17 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी मानगढ़ की पहाड़ी पर एकत्रित हुए थे। अंग्रेजी सेना ने पहाड़ी को घेरकर गोलीबारी की, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी शहीद हुए। मानगढ़ की यह घटना जनजातीय समाज के इतिहास में अमिट बलिदान के रूप में दर्ज है।

उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम को आदिवासियों का जलियांवाला बाग कहा जाता है। ऐसे ऐतिहासिक और बलिदान स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलना आदिवासी समाज के सम्मान और देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को उचित स्थान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार की ओर से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश की गई थी, तो इसके बावजूद अब तक इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित क्यों नहीं किया गया?

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए।

इस अवसर पर  प्रदेश महासचिव एवं प्रवक्ता पंकज कुमार शर्मा, शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़,अजय सिंह, अरुण टांक, कल्याण सिंह राव, कामिनी गुर्जर, शाहिद हुसैन सहित अनेक कांग्रेस पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!