उदयपुर। मनोविश्लेषक डॉ. अंजू गिरी का कहना है मानसिक अवसाद को प्राथमिक चरण में ही ख़त्म कर देना चाहिये ताकि मनुष्य को उस स्थिति में पंहुचने से पहले ही उसे रोका जा सकें।
वे आज “लक्ष्य शांति मेंटल हेल्थ फर्स्ट ऐड सर्विस” संस्थान द्वारा सुखाड़िया सर्किल स्थित एक निजी होटल में आयोजित संगोष्ठी में बोल रही थी। उन्हांेने बताया कि मेंटल डिप्रेशन,चिंता,अपराध बोध को प्रारंभ में ही चिन्हित कर निवारण हेतु काउंसिलिंग की जाये तो सुसाइड और जीनोसाइड जैसे मानसिक विकृत्यों को समाज से ख़त्म किया जा सकता है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है कि देश में आत्महत्या के आंकड़ों में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं राजस्थान में पिछले तीन साल में इन आंकड़ों मे उदयपुर ज़िला सबसे ऊपर है। अलग अलग उम्र के आत्महत्या आंकलन से पता चलता है कि 18 वर्ष से कम उम्र के लड़के ऑनलाइन गेम्स, आर्थिक मंदी, शारीरिक अपंगता की वजह से और लड़कियाँ कम उम्र में शादी, बलात्कार और एजुकेशन ड्रॉपआउट की वजह से सुसाइड कर लेते हैं।
डॉ. गिरी ने कहा कि ब्रेकअप ,मानसिक अवसाद, बेरोज़गारी, गृह क्लेश सैल्फ प्रेस्टीज अन्य कई कारण है जिससे वयस्क भी आत्म हत्या कर सकते हैं।उन्होंने बताया माता पिता को बच्चे के व्यवहार में नकारात्मक परिवर्तन पर ध्यान ज़रूरी देना चाहिए।
मानसिक अवसाद को प्राथमिक चरण में ही ख़त्म करेंःडॉ. अंजू गिरी
