भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश
कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर बोले – भारतीय संस्कृति विश्व में अद्भुत, भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी
उदयपुर, 15 अक्टूबर। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक श्रमजीवी महाविद्यालय परिसर में डांडिया महोत्सव पारंपरिक उल्लास, सांस्कृतिक रंगों और भक्तिमय वातावरण के बीच भव्यता से आयोजित किया गया। संकाय सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता से आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर कुलपति प्रो. मंजू मांडोत, प्रो. मलय पानेरी, प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. धमेन्द्र राजौरा ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर किया। आयोजन में गुजराती और राजस्थानी लोकगीतों की धुन पर पारंपरिक परिधानों में सजे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने गरबा और डांडिया की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया।
महोत्सव में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर, कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर कुलाधपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं विश्व में अद्भुत एवं विशिष्ट पहचान रखती हैं। हमारी सांस्कृतिक विरासत केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन मूल्यों, आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव का संदेश भी देती है। इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र के नौ दिन शक्ति, साधना और आत्मविश्वास अर्जित करने के अवसर हैं। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना बुराई पर अच्छाई, अन्याय पर न्याय और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। गरबा और डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्य हमारी लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ समाज में एकता, उल्लास और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।
कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि भारत त्योहारों और परंपराओं की समृद्ध भूमि है। प्रत्येक पर्व हमें जीवन में सकारात्मकता, प्रेम और सद्भाव अपनाने की प्रेरणा देता है। त्योहारों को पूरे उत्साह से मनाने के साथ यह भी आवश्यक है कि किसी की भावनाएं आहत न हों तथा सामाजिक सौहार्द बना रहे।
महोत्सव ने शिक्षा के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रेरक संदेश दिया।
