उदयपुर। तुलसी परिवार व नन्दी वन वैदिक गौशाला धाम भुज के तत्वावधान में ए.एस.राठौड़ की ओर से भुवाणा रोड़ स्थित देेवेन्द्र धाम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का मंगलवार को पूर्ण भक्ति-भाव एवं श्रद्धा-आस्था के साथ समापन हो गया।
ए.एस. राठौड़ ने बताया कि समापन अवसर देवेन्द्रधाम में श्रद्धालुओं की श्रद्धा इस कदर उमड़ी कि वहां पर रखी सारी कुर्सियां खचाखच भर गई। जितने श्रद्धालु वहां बैठे हुए थे उतने गार्डन में खड़े हो कर भक्ति रस का पान कर रहे थे। वह लगातार भक्ति नृत्य ही कर रहे थे। देवेन्द्र धाम के गार्डन में पांव रखने तक की जगह नहीं बची थी। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को उत्साह और आस्था इस कदर परवान पर थी कि कथा प्रारम्भ होने के एक घंटे बाद तक भी कई महिलाएं समूह में कथा स्थल पर आते रहे।
कथा में श्रीकृष्ण के भजनों पर संगीत की धुन पर हर महिला- पुरूष श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य करके श्रीमद् भागवत के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा एवं भावों को दर्शाया। इस दौरान खूब भजन भाव हुए। समापन पर ऐसी भक्ति रस की बरसात हुई कि पूरा पाण्डाल उसमें भीग गया। मेरा श्याम बडा अलबेला मेरी मटकी में मार गया ढेला…… श्याम भजन पर तो पूरा पाण्डाल ऐसे भक्ति रस में डूबा कि मानो वहां पर साक्षात द्वापर ही नजर आया। कई महिला- पुरूष श्रद्धालु समापन अवसर पर इतने भावुक हो गये कि उनकी आंखों से अश्रुधारा बहनें लगी।
समापन अवसर पर कथा वाचक ब्रह्मऋषि किरिट भाई ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि भागवत कथा सुनने से पापों का नाश, मन की शांति, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भागवत हमें यही प्रेरणा देती है कि जीवन अस्थायी है, लेकिन भगवान की भक्ति ही स्थायी है। अंत समय में भगवान का स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।उन्होंने जगत, जीव, परमात्मा और संसार के बींच सम्बन्धों के बारे में बताते हुए सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, भागवत महात्म्य के भावपूर्ण प्रसंगों को सुनाया। उन्होंने कहा कि गलत रास्ते और अनीति से आया पैसा कभी भी शुभ काम में नहीं लग सकता। वो जैसे आता हे वैसे ही चला जाता है।
सात दिवसीय भागवत कथा सम्पन्न,कथा श्रवण करनें उमड़ी भीड़
