भारत में विधिक सुधार और सामाजिक परिवर्तन: मुद्दे एवं चुनौतियॉ
विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन
प्रो. आनंद पालीवाल को कानून कोहिनूर अलंकरण से नवाजा
कानूनों में बदलाव कर ही भारत विकसित भारत की ओर अग्रसर – प्रो. पालीवाल
उदयपुर 22 दिसम्बर / किसी भी राष्ट्र का मूल्यांकन, वहॉ की सोसायटी से जाना जाता है, वहॉ का कैसा समाज है, कैसी सभ्यता है, वहॉ की सामाजिक व्यवस्था क्या है, वहॉ की विधि की उपयोगिता कितनी है? औद्योगिक क्राति भी इसी पर निर्भर करती है। देश में समाज की वजह से कानून में बदलाव होता है या कानून की वजह से हमारे समाज में सामाजिक परिवर्तन आया है। आजादी के समय बनाये गये कानूनों में समाज व समय की मांग के अनुसार कई संशोधन किए गए है। हाल ही में लोकसभा में तीन नये संशोधन किये गये जो राज्यसभा से भी पास हो गये हैं। इन्हीं कानूनों के बदलाव से आज भारत विकसित भारत की ओर से अग्रसर है। उक्त विचार शुक्रवार को राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक विधि महाविद्यालय की ओर से प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में भारत में विधिक सुधार और सामाजिक परिवर्तन: मुद्दे एवं चुनौतियॉ विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी विधि आयोग भारत सरकार के सदस्य प्रो. आनंद पालीवाल ने बतौर मुख्य वक्ता कही। प्रो. पालीवाल ने कानून में हुए बदलावों पर चर्चा करते हुए कहा कि इससे हमारे समाज में कई सामाजिक बदलाव हुए है। चिकित्सा सुविधा आम जन का अधिकार नहीं है, यह समस्या कोविड के समय आई थी जब चिकित्सकों ने भर्ती करने से मना कर दिया तब गुजरात में एक याचिका दर्ज कर इस पर कोर्ट द्वारा राहत दी गई और आदेश दिया कि कोविड मरीजों का भुगतान सरकार द्वारा किया जायेगा। उन्हांेने कहा कि अपराध सहना भी एक अपराध है। महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए घरेलू हिंसा से सुरक्षा अधिनियम 2005 कानून बनाया गया है। जिसके द्वारा पीड़ित महिला को निशुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है उन्हे थाने में जाने की भी जरूरत नही होती है वे सीधे ही अपना वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर सकती है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि जागरूकता से ही समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है। कानून बना देने मात्र से घटनाओं में कमी नहीं हो सकती है इसके लिए युवाओं को नेतृत्व कर समाज को जागृत करना होगा और उनके अधिकारों की जानकारी देनी होगी। आमजन को भी समाज व सरकार के बीच सेतू का कार्य करना होगा। भारत में कानून नागरिकों के लिए आचरण के आदर्श केा स्थापित करता है। व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए कानून ही सफल रहे यह जरूरी नहीं है।
मुख्य अतिथि उपायुक्त देवस्थान विभाग जतिन कुमार गांधी ने कहा कि न्याय में देरी भी एक अन्याय है। आम जन को सस्ता व सुलभ न्याय मिले इसकी पुख्ता व्यवस्था की जानी होगी। आज हमारे देश में 5 करोड़ से ज्यादा मामले लम्बित है। इसके लिए हम सभी दोषी है। विधि के क्षेत्र में पढ़ना और प्रेक्टिस करना दोनो में बहुत अंतर है। आज समय की मांग के अनुसार हर रोज नये नये कानून आ रहे है इसके लिए अधिवक्ता को अपडेट रहने की जरूरत है। व्यक्ति सामाजिक प्राणी है समाज में रीति रिवाज के आधार पर परिवर्तन आ रहे है। समाज में कोई कृत्य होता है तभी नये कानून बनाये जाते है। 2013 में निर्भया कांड होने के बाद कानून बना, आवश्यकता है घटना पूर्व ही कानून बने जिससे आम जन में उसका डर हो।
विशिष्ठ अतिथि कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि हमारे देश में दुर्घटना होने के बाद कानून बनाये जाते है जो उचित नहीं है। कानून का सख्ती से पालन हो यह भी सुनिश्चित किया जाना होगा।
प्रो. आनंद पालीवाल को कानून कोहिनूर अलंकरण से नवाजा:-
इस अवसर पर कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, उपायुक्त देवस्थान विभाग जतिन कुमार गांधी, डॉ. कला मुणेत ने विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए निष्णात तथा कुशल कानून विद प्रो. आनंद पालीवाल को ‘‘ कानून कोहिनूर ’’ अलंकरण से विभूषित किया गया, जिसके तहत उन्हे पगड़ी, उपरणा, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर नवाजा गया। प्रो. सारंगदेवोत ने बताया कि इससे पूर्व इस सम्मान से न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी को नवाजा गया था।
प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. कला मुणेत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एक दिवसीय संगोष्ठी की जानकारी दी।
संचालन डॉ. के.के. त्रिवेदी ने किया जबकि आभार डॉ. सुरेन्द्र सिंह चुण्डावत ने जताया।
संगोष्ठी में प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. भारत सिंह देवड़ा, डॉ. मीता चौधरी, डॉ. सुरेन्द्र सिंह चुण्डावत, डॉ. प्रतीक जांगिड, डॉ. के.के. त्रिवेदी, भानु कुंवर सिंह, छत्रपाल सिंह, डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह राठौड, डॉ. विनिता व्यास, डॉ. रित्वी धाकड, अंजु कावड़िया, सहित अकादमिक सदस्य एवं बड़ी संख्यॉ में भावी अधिवक्ता उपस्थित थे।
