चरम तीर्थंकर ने लिया जन्म, गुंजा जय जय नंदा जय जय भद्दा
उदयपुर। पर्युषण पर्व के पाँचवे दिन अणुव्रत दिवस पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती शासन श्री मुनि सुरेश कुमार ने कहा- जो श्रावक रत्नत्रयी का ज्ञाता होता है उसके लिए जरूरी है कि वह सम्यक दर्शन की आराधना करें। व्रत स्वयं से जुड़ने की एक दिव्य प्रेरणा और मन की वृप्ति का सर्वोत्तम उपाय है, इससे कामना और वासना के रास्ते बंद हो जाते है। समाज में समस्याओं का अंत तभी हो सकता है जब मानव मन में व्रत की चेतना जागे। अणुव्रत व्यक्तिगत सामाजिक, राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय सभी समस्याओं का समाधान है। इन्हे जीवन शैली बनाने…
