उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने प्रातकालीन धर्म सभा में कहा कि जीवन में ज्ञान है तो सब कुछ है बिना ज्ञान के कुछ भी नहीं है। अगर मनुष्य में ज्ञान है तो वह बड़ी से बड़ी समस्याओं का भी समाधान कर सकता है।
ज्ञानवान व्यक्ति हर काम को सोच समझ कर ही करता है। ज्ञान पाने के लिए सबसे पहले विनयवान बनना पड़ता है। बिना विनय के ज्ञान प्राप्ति संभव नहीं है। दुनिया में ऐसे कई व्यक्ति भी होते हैं जिनमें ज्ञान के नाम पर होता कुछ नहीं है लेकिन वह अपने आप को बहुत बड़ा ज्ञानी समझने लगते हैं। ऐसे व्यक्ति थोथा चना बाजे गाना उस तरह के होते हैं। आधा ज्ञान रखने वाले ना तो स्वयं का हित कर सकते हैं और न हीं दूसरों के कोई काम आ सकते हैं वह हर समय अच्छे कामों में बाधाएं जरूर उत्पन्न कर सकते हैं।
अज्ञानी व्यक्ति कई बार अपने अज्ञानता के वशीभूत ऐसे गलत रास्ते पर भी चला जाता है, जिससे उसका और परिवार का नुकसान होता है। जब उसे कोई रोकना है या टोकता है, तब भी वह उनकी बातों को अनदेखा करके यह सोच लेता है कि मेरे जैसा कोई नहीं है। मैं जो कर रहा हूं बिल्कुल सही कर रहा हूं। जो मुझे रोक रहे हैं टोक रहे हैं वह मेरी सफलता से जलते हैं। ऐसा विचार करना ही मिथ्या है। ऐसे मिथ्या विचार रखने वाले कभी ज्ञान अर्जन नहीं कर सकते हैं।
डॉ वरुण मुनि ने ज्ञान के महत्व को बताते हुए कहा कि अगर व्यक्ति को ज्ञानवान बनना है तो सबसे पहले क्रोध कषाय मान माया मोह को त्यागना होगा। बिना ज्ञान के न स्वयं का उद्धार हो सकता है और नहीं अपनी आत्मा का कल्याण हो सकता है। बिना ज्ञान के जीवन व्यर्थ हो जाता है। अज्ञानी व्यक्ति के पग पग पर परेशानियां आती है। अज्ञानी व्यक्ति को हर जगह पर तिरस्कृत होना पड़ता है। इसलिए हमेशा गुरु के सानिध्य में रहकर विनयवान बनकर ज्ञान मार्ग की ओर अग्रसर होने में ही जीवन का उत्थान है और आत्मा का कल्याण है।
महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। बुधवार को बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।
ज्ञान से बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधना किया जा सकताःसुकनमुनि
