क्रोध मान माया लोभ अहंकार कषाय यह सभी आत्मा को शुद्ध रखने में बाधकःसुकनमुनि

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में आयोजित धर्मसभा में बोलते हुए श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनी महाराज ने कहा कि अपने जीवन को प्रभु आराधना और धर्म ध्यान से तरो ताजा रखोगे तो ही आप आत्म कल्याण की ओर अग्रसर होंगे। आत्म कल्याण का मार्ग प्रभु की वाणी और गुरुओं के सानिध्य से ही प्राप्त होगा। जीवन में जो शुद्ध होता है उसका ही महत्व होता है। आत्मा को भी शुद्ध रखना जरूरी है। क्रोध मान माया लोभ अहंकार कषाय यह सभी आत्मा को शुद्ध रखने में बाधक है।
उन्होंने कहा कि इससे आत्मा अपवित्र होती है। अगर अपनी आत्मा को पवित्र रखना है तो इन सब से दूर रहकर मन में पवित्र भाव को धारण करना होगा। जीवन का निर्माण तो प्रभु श्री महावीर की वाणी से ही संभव है। मनुष्य जीवन तो हमें मिल गया है लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि मनुष्य का शरीर नश्वर है। एक दिन शरीर को छोड़कर हमें संसार से जाना होगा। आत्मा अजर अमर है। हमें आत्मा की पवित्रता और शुद्धता पर ध्यान देना होगा।
जितना हम शरीर पर ध्यान देंगे उतना ही ध्यान अगर हम हमारी आत्मा पर देंगे तो हम मोक्ष मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं। शरीर को आप कितना ही सजा लो सवार को लेकिन शरीर कभी आत्मा का नहीं हो सकता। आत्मा का कल्याण करने के लिए एक बात हमेशा ध्यान रखना चाहिए। जिसके मन में सेवा भाव होता है हमेशा प्रभु भी उसके साथ रहते हैं। मनुष्य जीवन में कई तरह की सेवा करने का अवसर हमें प्राप्त होता है। लेकिन संसार में सबसे बड़ी सेवा माता-पिता की सेवा मानी गई है। जो पुत्र अपने माता-पिता को पूछ कर काम करते हैं उनके हर कार्य सफल होते हैं। लेकिन जो माता-पिता की कदर नहीं करते जो माता-पिता को पूछे बिना ही कार्य करते हैं उनके कार्य सफल नहीं होते हैं।
डॉ.वरुण मुनि ने कहा कि धर्म मनुष्य जीवन का छाता है। जब कभी बरसात आती है तो छाता ही हमें सुरक्षा प्रदान करता है। भीषण गर्मी में तेज धूप से छाता ही हमें बचता है। इस तरह से अगर हमारे जीवन में हम धर्म रूपी छाते को धारण करेंगे तो जितने भी क्रोध कषाय मान माया लोभ अहंकार इन सब से हम बच सकते हैं और हमारी आत्मा का कल्याण करते हुए हम मोक्ष मार्ग को प्राप्त कर सकते हैं।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि ने सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। रविवार को बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।

By Udaipurviews

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