देवेंद्र धाम में जन्म जयंती पर भक्तामर अनुष्ठान, गुणानुवाद धर्मसभा और भव्य भंडारे का आयोजन
उदयपुर, 1 नवंबर। महावीर समवशरण, देवेंद्र धाम में रविवार को आचार्य देवेंद्र की जन्म जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर भव्य भक्तामर अनुष्ठान, गुणानुवाद धर्मसभा, भजन प्रस्तुतियों और भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं और गुरु भक्तों ने भाग लेकर आचार्यश्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने अपने आराध्य गुरुदेव आचार्य देवेंद्र के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्यश्री साहित्य के पुरोधा पुरुष थे। उन्होंने हिंदी, संस्कृत, प्राकृत और गुजराती सहित विभिन्न भाषाओं में विपुल साहित्य का सृजन कर समाज को ज्ञान, धर्म और संस्कारों की अमूल्य धरोहर प्रदान की। उन्होंने बताया कि उदयपुर के ओसवाल बरडिया वंश में जन्मे बालक देवेंद्र ने अपनी माता और बहन के साथ बाड़मेर जिले के खांडप ग्राम में जैन भागवती दीक्षा ग्रहण की थी। गुरु पूज्य पुष्कर मुनि के सान्निध्य में उन्होंने भारतभर में विचरण करते हुए साहित्य सृजन और धर्म प्रभावना के कार्य किए। उन्हीं की पावन स्मृति में स्थापित देवेंद्र धाम आज समाज और धर्म की सेवा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
डॉ. सुरेंद्र मुनि ने अपने संबोधन में स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध, सात्विक और संतुलित खान-पान की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि ऋतु के अनुकूल आहार और नियमित दिनचर्या अपनाकर अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। स्वस्थ शरीर ही व्यापार, सामाजिक सेवा और धर्म-आराधना के कार्यों को आनंदपूर्वक करने का आधार है।
400 पुस्तकों के अध्ययन की प्रेरणा
समारोह में श्राविका संघ और देवेंद्र महिला संस्थान की ओर से भक्तिमय भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं। श्रावक संघ के अध्यक्ष रोशन लाल जैन, तारक ग्रंथालय के मंत्री रमेश खोखावत, नाकोड़ा ज्योतिषी कांतिलाल जैन, शिक्षक नेता भंवर सेठ, पाली से होशियार सिंह मेहता और भीलवाड़ा से रणजीत मल सेठ सहित गुरु भक्तों ने आचार्य देवेंद्र के जीवन एवं साहित्यिक योगदान पर विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को आचार्यश्री द्वारा लिखित 400 पुस्तकों में से प्रतिदिन एक पुस्तक पढ़ने और उनके विचारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई।
देवेंद्र धाम की अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर रजनी डांगी ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए गुरु वंदना प्रस्तुत की। जयपुर, जोधपुर, पाली और भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से आए गुरु भक्तों का समाज की ओर से स्वागत एवं बहुमान किया गया।
भंडारे में हजारों लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद
आचार्य देवेंद्र की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में गोपाल मुणेत एवं अनिल पुनमिया लाभार्थी परिवारों की ओर से देवेंद्र धाम के मुख्य द्वार पर भुवाणा रोड पर राहगीरों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले इस सेवा कार्य में हजारों राहगीरों ने प्रसाद ग्रहण किया। लाभार्थी परिवारों की इस पहल के माध्यम से आमजन को सेवा और परोपकार का संदेश दिया गया। समूचा आयोजन श्रद्धा, भक्ति और गुरु स्मरण के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही।
आचार्य देवेंद्र साहित्य के पुरोधा पुरुष थे, रचनाएं अमूल्य धरोहर – डॉ. राजेंद्र मुनि
