हनुमानजी की 131 फीट ऊंची प्रतिमा का रामनवमी के मौके पर हुआ लोकापर्ण

—निर्माण के दौरान 3 साल लगातार चलता रहा सुंदरकांड
—30 किलोमीटर दूर से दिखेगी, सोने जैसा रंग चढ़ा
राजसंमद। जिले के नाथद्वारा क्षेत्र में 131 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ का श्रीराम नवमी के मौके पर लोकार्पण हुआ। इसे दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा विश्वास स्वरूपम के सामने करीब 500 फीट की ऊंचाई पर गिरिराज पर्वत पर बनाया गया है। प्रतिमा की स्वर्ण चमक फीकी नहीं पड़े, इसके लिए थाइलैंड से विशेष गोल्ड कलर मंगवाया गया है। करीब 150 टन वजनी प्रतिमा के निर्माण में कोई परेशानी नहीं आए, इसके लिए 3 साल तक हर दिन सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
गिरिराज पर्वत पर प्रणाम मुद्रा में बजरंगबली : दक्षिणमुखी प्रतिमा प्रभु श्रीनाथजी और विश्वासरूपम प्रतिमा (भगवान शिव) की ओर प्रणाम मुद्रा में तैयार की गई है। प्रतिमा की स्थापना का उद्देश्य स्वामी भक्ति को बताया गया है, इसी वजह बजरंगबली का मुख श्रीनाथ जी और शिव प्रतिमा की ओर है। माना जाता है कि प्रभु श्रीनाथजी जब ब्रज से मेवाड़ पधारे, तब सभी देवी-देवता भी श्रीजी की सेवा के लिए उनके साथ मेवाड़ आए, इसलिए हनुमानजी की प्रतिमा का नाथद्वारा में गिरिराज पर्वत पर स्थापना की गई। निर्माण कार्य के दौरान यहां लगातार धार्मिक अनुष्ठान भी किया गया। शास्त्रों के अनुसार- दक्षिणमुखी प्रतिमा तंत्र और भक्ति शास्त्र के अनुसार अत्यंत फलदायी और रक्षक मानी जाती है।
हवा के तेज दबाव के बीच क्रेन खड़ी रखना भी असंभव था : प्रतिमा का निर्माण विश्वास स्वरूपम बनाने वाले मूर्तिकार नरेश कुमावत ने किया है। कुमावत का कहना है कि पहाड़ी के ऊपर हवा का दबाव इतना अधिक होता है कि क्रेन को खड़ी रखना भी करीब-करीब असंभव था। हर समय हादसे की आशंका बनी रहती थी। प्रतिमा को मॉर्डन टेक्नोलॉजी और मजबूत संरचना के साथ तैयार किया गया। ये प्रतिमा करीब 13 मंजिल इमारत जितनी ऊंची है। प्रतिमा जिस बेस पर बनाई गई है उसकी ऊंचाई करीब 20 फीट है। वहीं, प्रतिमा 111 फीट ऊंची है। इस तरह जमीन से इसकी कुल हाइट 131 फीट है।
कुमावत ने बनाईं 6 हजार से ज्यादा मूर्तियां : हनुमान प्रतिमा के मूर्तिकार नरेश कुमावत देश-विदेश में 6 हजार से अधिक मूर्तियां बना चुके हैं। कनाडा में 14 से अधिक मूर्तियां विभिन्न मंदिरों में स्थापित हैं। जहां हनुमानजी से लेकर शिवजी की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं हैं। इसके अलावा उन्होंने न्यू पार्लियामेंट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और राम मंदिर में भी काम किया है। प्रतिमा निर्माण से जुड़े गिरीश रतिलाल शाह ने बताया- यह प्रतिमा क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बनने के साथ ही नाथद्वारा में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी।

By Udaipurviews

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